*भव्य रामलीला एवं दशहरा महोत्सव 2026:*
श्री धार्मिक रामलीला मंचन 11 अक्टूबर 2026 से 20 अक्टूबर 2026 तक शायं 7 बजे
*मुख्यतिथि:- बच्चू सिंह गुर्जर (बैंसला) राष्ट्रीय संगठन महामंत्री अखिल भारतीय गुर्जर महासभा रहे हैं।*
12 अक्टूबर 2026 मंचन- भगवान नारद की मोह लीला, रावण दरबार एवं देवासुर संग्राम
परम श्रद्धेय परम पूज्य गोस्वामी सुशील जी महाराज जी के दिशा निर्देशन तथा हमारे युवा अध्यक्ष श्री आनंद भाटी जी के मार्गदर्शन में श्री धार्मिक रामलीला का भव्य मंचन
संस्था के अध्यक्ष श्री आनंद भाटी जी ने बताया कि प्रभु श्री राम की दूसरे दिन की लीला में भगवान नारद ध्यान करने के लिए बैठे हैं भगवान इंद्र के कहने पर स्वर्ग की अप्सराएं बहुत प्रयास करती हैं जिससे कि भगवान नारद की तपस्या भंग हो जाए स्वयं कामदेव तपस्या भंग करने के लिए अपने संपूर्ण प्रयास करते हैं और विफल हो जाते हैं जब इस बात का भगवान नारद को भान होता है इस बात का उनके अंदर अहंकार आ जाता है कि वह कामदेव विजई है और कामदेव ने भी उनकी तपस्या भंग नहीं कर पाई इस अहंकार के वशीभूत होकर वह चारों तरफ पूरे ब्रह्मांड में यह चर्चा करने लगते हैं। भगवान ब्रह्मा से भी जाकर अपनी प्रशंसा करते हैं भगवान शिव से भी जाकर अपनी खुद की प्रशंसा करते हैं कि उन्होंने कामदेव को जीत लिया है और जब अंत में भगवान विष्णु के पास अपनी इस विजय की गाथा को गाने के लिए पहुंचते हैं और भगवान विष्णु देखते हैं कि एक इस ब्रह्मांड का महा भक्त कैसे अहंकार से ग्रसित होकर अपने पथ से डगमगा रहा है और इससे बाहर निकालने के लिए वह एक दिव्य लीला रचते हैं एक अलग पूरी बनाते हैं जहां की सुंदर राजकुमारी के विवाह की तैयारी देखकर के भगवान नारद वहां के राजा से मिलने जाते हैं उस कन्या से मिलने के पश्चात उस पर मोहित हो जाते हैं और भगवान के पास आकर अपना विचार रखते हैं और उनके जैसा स्वरूप मांगते हैं। जिससे वह कन्या उनको वर के रूप में चुन ले भगवान उनको बंदर का रूप दे देते हैं उनकी बड़ी जग हंसाई होती है उस कन्या का विवाह जब उनसे नहीं हो पाता इस बात से दुखी होकर और जब उनको पता चलता है कि उनका मुख बंदर का है और यह सब कुछ भगवान विष्णु ने किया है वह स्वयं भगवान विष्णु को श्राप देते हैं और इस अहंकार से कि वह कामदेव पर विजय प्राप्त कर लीए है बाहर निकलते हैं ।
रावण दरबार में रावण ने अपने तीनों लोकों पर विजय की योजना बनाई और सभी राक्षसों का प्रतिनिधित्व करते हुए देवताओं पर विजय प्राप्त करने के लिए संघर्ष प्रारंभ करने का निश्चय लेकर आक्रमण की सभी तैयारियां कर ली इसके पश्चात देवताओं और राक्षसों में बहुत ही भयंकर देवासुर संग्राम हुआ
यह सभी लीलाएं बड़ी ही मनमोहक रही सभी दर्शकों ने इन लीलाओं का अद्भुत आनंद लिया
*विशेष आकर्षण*
13 अक्टूबर राम जन्म सीता जन्म बाल लीला विद्या अभ्यास, 14 अक्टूबर ताड़का बध सीता स्वयंवर राम बारात, 15 अक्टूबर कैकई मंधरा संवाद राम बनवास चित्रकूट, 16 अक्टूबर ऋषि मिलन पंचवटी सुपर्णखा सीता हरण जटायु वध, 17 अक्टूबर राम भरत मिलाप सबरी, राम हनुमान मिलन किष्किंधा, बाली वध अशोक वाटिका, 18 अक्टूबर लंका दहन, सेतु निर्माण ,रावण और अंगद संवाद 19 अक्टूबर लक्ष्मण मेघनाथ, राम कुंभकरण रावण युद्ध
इस बार का दशहरा महोत्सव और रामलीला मंचन क्षेत्रवासियों के लिए अत्यधिक आनंददायक, यादगार और पीढ़ियों को संस्कारित करने वाला एक ऐतिहासिक आयोजन बनने जा रहा है।
इस मौके पर संस्था के संस्थापक गोस्वामी सुशील जी महाराज संस्थापक श्री राजकुमार नागर श्री प्रदीप शर्मा श्री शेर सिंह भाटी श्री हरवीर मावी मुख्य संरक्षक श्री नरेश गुप्ता संरक्षक श्री सुशील नागर श्री धीरेंद्र भाटी श्री धीरज शर्मा श्री बालकिशन सफीपुर श्री दिनेश गुप्ता श्री पवन नागर श्री मनोज गुप्ता श्री सतीश भाटी अध्यक्ष श्री आनंद भाटी महासचिव श्रीमती ममता तिवारी कोषाध्यक्ष श्री अजय नागर वरिष्ठ उपाध्यक्ष श्री महेश शर्मा बदौली श्री उमेश गौतम श्री सत्यवीर मुखिया श्रीमती रोशनी सिंह श्री महेश कमांडो श्री चैन पाल प्रधान श्री जितेंद्र भाटी श्री सुभाष भाटी श्री मनीष डाबर मीडिया प्रभारी श्री अतुल आनंद उपाध्यक्ष श्री फिरे प्रधान श्री पी पी शर्मा श्री श्याम सुंदर फौजी श्री यशपाल नागर सचिव श्रीमती ज्योति सिंह श्रीमती गीता शागर श्री राकेश भाटी श्री भगवत भाटी श्री तेज कुमार भाटी श्री सुंदर भाटी श्री पवन भाटी श्री वीरपाल मावी श्री जय शर्मा उपस्थित रहे हैं।


