22 अक्टूबर से प्राधिकरण कार्यालय के बाहर सत्याग्रह का ऐलान
2 अक्टूबर से 44 गांवों में पैदल मार्च, किसानों को आंदोलन से जोड़ने की तैयारी।
ग्रेटर नोएडा। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण से प्रभावित 44 गांवों के किसानों ने शेष 4 प्रतिशत आवासीय भूखंड की मांग को लेकर आंदोलन तेज करने का ऐलान किया है। सेक्टर अल्फा वन स्थित प्रेस क्लब ऑफ भारत में आयोजित प्रेस वार्ता में किसानों ने कहा कि करीब एक वर्ष से लगातार आंदोलन और अधिकारियों से वार्ता के बावजूद उनकी मांग का समाधान नहीं हुआ है। अब किसान किसी संगठन के बैनर के बजाय अपने स्तर पर आंदोलन को आगे बढ़ाएंगे।
किसानों ने घोषणा की कि 22 अक्टूबर से ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण कार्यालय के बाहर सत्याग्रह शुरू किया जाएगा। इससे पहले आंदोलन को लेकर 44 गांवों में जनजागरूकता अभियान चलाया जाएगा। किसानों के अनुसार, इस अभियान का उद्देश्य गांव-गांव जाकर किसानों, महिलाओं और युवाओं को आंदोलन से जोड़ना है।
2 अक्टूबर से शुरू होगा 44 गांवों का पैदल मार्च
आंदोलन की तैयारियों के तहत 2 अक्टूबर, महात्मा गांधी जयंती के अवसर पर गांव घंघोला से पैदल मार्च शुरू करने की घोषणा की गई है। किसानों के मुताबिक यह मार्च 44 गांवों तक पहुंचेगा। इस दौरान ग्रामीणों से संपर्क कर उन्हें शेष 4 प्रतिशत आवासीय भूखंड की मांग और आगामी सत्याग्रह के बारे में जानकारी दी जाएगी।
किसानों का कहना है कि आंदोलन को इस बार व्यापक जनभागीदारी के साथ आगे बढ़ाया जाएगा। इसमें 44 गांवों के किसान, महिलाएं और युवा शामिल होंगे।
एक साल से जारी है किसानों का आंदोलन
किसानों के मुताबिक पिछले करीब एक वर्ष में उन्होंने अपनी मांग को लेकर कई स्तरों पर आंदोलन किया है। इसमें भूख हड़ताल, पैदल मार्च और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के गेट पर धरना-प्रदर्शन शामिल हैं।
बीते दिनों प्राधिकरण तक निकाले गए पैदल मार्च के दौरान किसानों ने अधिकारियों को सितंबर तक उनकी मांग का समाधान करने का समय दिया था। किसानों का कहना है कि उस समय स्पष्ट किया गया था कि यदि सितंबर तक समाधान नहीं हुआ तो अक्टूबर में आंदोलन को और बड़ा किया जाएगा।
अब किसानों ने 22 अक्टूबर से प्राधिकरण कार्यालय के बाहर सत्याग्रह शुरू करने की घोषणा की है।
6 प्रतिशत और 10 प्रतिशत भूखंड का मुद्दा
किसानों के अनुसार, भूमि अधिग्रहण के बाद प्रभावित किसानों को मुआवजे के साथ 6 प्रतिशत आवासीय भूखंड का लाभ दिया गया था। इसके बाद कुछ किसान अधिक मुआवजे और अतिरिक्त भूखंड की मांग को लेकर न्यायालय चले गए।
किसानों का दावा है कि उस समय तत्कालीन ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सीईओ रमा रमण ने अन्य किसानों से न्यायालय नहीं जाने की अपील की थी। किसानों के अनुसार, उनसे कहा गया था कि न्यायालय जाने से विकास कार्य प्रभावित हो सकते हैं।
किसानों का आरोप है कि बाद में न्यायालय जाने वाले किसानों को 10 प्रतिशत आवासीय भूखंड का लाभ मिला, जबकि न्यायालय नहीं जाने वाले किसान 6 प्रतिशत भूखंड तक ही सीमित रह गए। इसी अंतर को खत्म करने के लिए किसान शेष 4 प्रतिशत आवासीय भूखंड की मांग कर रहे हैं।
आश्वासन नहीं, समाधान की मांग
किसानों का कहना है कि जब भी उनकी ओर से आंदोलन किया जाता है, प्राधिकरण के अधिकारी मौके पर पहुंचकर समस्या के जल्द समाधान का आश्वासन देते हैं। हालांकि, किसानों के मुताबिक कई वर्ष बीतने के बावजूद शेष 4 प्रतिशत भूखंड का लाभ नहीं मिला है।
किसानों ने कहा कि इस बार आंदोलन केवल आश्वासन मिलने के बाद समाप्त नहीं किया जाएगा। उनका कहना है कि जब तक शेष 4 प्रतिशत आवासीय भूखंड की मांग का समाधान नहीं होता, तब तक संघर्ष जारी रहेगा।
किसानों ने स्पष्ट किया कि 22 अक्टूबर से प्रस्तावित सत्याग्रह को 44 गांवों की भागीदारी के साथ आगे बढ़ाया जाएगा। इसके लिए 2 अक्टूबर से गांव-गांव पैदल मार्च और जनसंपर्क अभियान शुरू किया जा रहा है।
44 गांवों में जनसंपर्क से आंदोलन को विस्तार देने की तैयारी
किसानों के अनुसार, आगामी दिनों में आंदोलन की रणनीति गांवों में जनसंपर्क के जरिए तैयार की जाएगी। किसानों, महिलाओं और युवाओं को आंदोलन की मांगों से अवगत कराया जाएगा। इसके बाद 22 अक्टूबर से ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण कार्यालय के बाहर सत्याग्रह शुरू किया जाएगा।
किसानों ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी टकराव के बजाय लंबे समय से लंबित मांग का समाधान हासिल करना है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस बार आंदोलन आश्वासन पर नहीं, बल्कि मांग के समाधान के बाद ही समाप्त किया जाएगा।


