3,000 से अधिक प्रदर्शक और 900 स्थायी शोरूम बने आकर्षण का केंद्र, एफटीए और निर्यात प्रोत्साहन पर विशेषज्ञों ने दी जानकारी
ग्रेटर नोएडा में भारतीय हस्तशिल्प की वैश्विक पहचान मजबूत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस, जापान और नीदरलैंड के खरीदारों ने जताई रुचि
ग्रेटर नोएडा। इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में आयोजित 62वें आईएचजीएफ दिल्ली मेला–ऑटम 2026 के चौथे दिन विदेशी खरीदारों ने भारतीय हस्तशिल्प, पारंपरिक कारीगरी और उत्पादों की विविधता की जमकर सराहना की। 13 से 17 अक्टूबर तक आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय मेले में दुनिया के विभिन्न देशों से आए खरीदार भारतीय उत्पादों में रुचि दिखा रहे हैं। मेले में 3,000 से अधिक प्रदर्शक, 900 स्थायी शोरूम, थीम आधारित प्रस्तुतियां और लाइव क्राफ्ट प्रदर्शन प्रमुख आकर्षण बने हुए हैं।
हस्तशिल्प निर्यात संवर्धन परिषद (ईपीसीएच) द्वारा आयोजित यह मेला भारतीय उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़ने का महत्वपूर्ण मंच बन रहा है। यहां होम डेकोर, फर्नीचर, फैशन, गिफ्टिंग, लाइफस्टाइल, फर्निशिंग और इंटीरियर से जुड़े उत्पादों की व्यापक श्रृंखला प्रस्तुत की गई है।
भारतीय हस्तशिल्प और आधुनिक डिजाइन ने खींचा खरीदारों का ध्यान
ईपीसीएच के अध्यक्ष डॉ. नीरज खन्ना ने कहा कि मेले के चार दिनों में प्रदर्शकों और खरीदारों के बीच व्यापक व्यावसायिक संवाद हुआ है। विभिन्न उत्पाद श्रेणियों में खरीदारों की मजबूत रुचि देखने को मिली। विशेष रूप से होम डेकोर, गिफ्टिंग, लाइफस्टाइल, फैशन, फर्नीचर और इंटीरियर से जुड़े उत्पादों की मांग उत्साहजनक रही।
उन्होंने बताया कि इस बार फर्नीचर क्षेत्र में ऐसे उत्पादों पर विशेष ध्यान दिया गया है, जो सीमित जगह में भी उपयोगी हों और आराम के साथ आधुनिक डिजाइन का अनुभव प्रदान करें।
मेले में सस्टेनेबिलिटी, पारंपरिक कारीगरी और आधुनिक डिजाइन का बेहतर समन्वय देखने को मिल रहा है। प्राकृतिक सामग्रियों, आकर्षक प्रिंट, विशिष्ट बनावट और पारंपरिक शिल्प तकनीकों से तैयार उत्पाद विदेशी खरीदारों को आकर्षित कर रहे हैं। विभिन्न कीमतों और श्रेणियों में उपलब्ध उत्पाद खरीदारों को अपनी जरूरत और बजट के अनुसार सोर्सिंग का अवसर प्रदान कर रहे हैं।
ईपीसीएच के मुख्य संरक्षक और आईईएमएल के अध्यक्ष डॉ. राकेश कुमार ने कहा कि उपभोक्ता अब ऐसे उत्पाद पसंद कर रहे हैं, जो उपयोगिता के साथ मानसिक सुकून, आराम और प्रकृति से जुड़ाव का अनुभव दें। प्राकृतिक सामग्री, हस्तनिर्मित वस्तुएं, वॉल आर्ट, भित्ति चित्र और मूर्तिकला आधारित सजावटी उत्पाद घरों को खास पहचान दे रहे हैं।
विदेशी खरीदारों ने बताया भारतीय उत्पादों का अनुभव खास
मेले में अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस, जापान और नीदरलैंड सहित कई देशों से आए खरीदारों ने भारतीय हस्तशिल्प और उत्पादों की सराहना की।
अमेरिका से आईं खरीदार डीन ऐशले ने भारतीय वस्त्रों, हस्तनिर्मित उत्पादों और पारंपरिक कारीगरी में रुचि दिखाई। उन्होंने फर्नीचर और अन्य उत्पादों का भी अवलोकन किया।
ऑस्ट्रेलिया से आए जेक व्हीलर पहली बार मेले में पहुंचे। फेस्टिवल उत्पादों के विशेषज्ञ व्हीलर ने आयोजन को बेहतरीन अनुभव बताया।
फ्रांस की एमिली ने टेबलवेयर, फर्नीचर तथा लकड़ी और लोहे से बने उत्पादों में रुचि दिखाई। उन्होंने उत्पादों की विविधता और नए आपूर्तिकर्ताओं से मिलने के अवसरों को सराहा।
जापान की तोमोको इदा ने रचनात्मक डिजाइन और सुंदर कारीगरी वाले संग्रहों की प्रशंसा की। उन्हें विशेष रूप से कपास, जूट और लिनेन जैसे प्राकृतिक रेशों से बने होम डेकोर उत्पाद पसंद आए।
नीदरलैंड से आए अरेंड मोस्टर्ड ने नए हॉल, प्रदर्शकों की विविधता और उत्पादों की विस्तृत श्रृंखला की सराहना की। गार्डन उत्पादों में रुचि रखने वाले मोस्टर्ड ने कहा कि भारत की विशिष्ट सामग्री और पारंपरिक कारीगरी, विशेषकर धातु शिल्प, अंतरराष्ट्रीय बाजार में अलग पहचान रखते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि नीदरलैंड के ग्राहकों को भारतीय रग और वस्त्र काफी पसंद हैं।
लाइव क्राफ्ट प्रदर्शन बने आकर्षण, कारीगरों को मिला मंच
ईपीसीएच के उपाध्यक्ष सागर मेहता ने बताया कि मेले में आयोजित लाइव क्राफ्ट प्रदर्शन आगंतुकों के लिए खास आकर्षण बने हुए हैं। इन प्रदर्शनों के माध्यम से खरीदारों को भारतीय कारीगरों की पारंपरिक तकनीकों, कौशल और रचनात्मकता को करीब से समझने का अवसर मिल रहा है। कुछ आगंतुकों ने स्वयं इन तकनीकों को आजमाकर हस्तशिल्प निर्माण की प्रक्रिया का अनुभव भी किया।
आईएचजीएफ दिल्ली मेला–ऑटम 2026 स्वागत समिति के अध्यक्ष अवधेश अग्रवाल ने बताया कि मेले में आयोजित ज्ञान सत्रों के दौरान निर्यातकों को अंतरराष्ट्रीय व्यापार के नए अवसरों की जानकारी दी गई।
‘इंडियाज एफटीए मोमेंट’ विषय पर आयोजित सत्र में भारत के मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) से मिलने वाले लाभों, बाजार तक पहुंच, मूल्य श्रृंखला और सोर्सिंग रणनीतियों पर चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने निर्यातकों को टैरिफ, मूल के नियमों और बाजार चयन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां दीं।
वहीं, ‘एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन’ पर आयोजित सत्र में हस्तशिल्प निर्यातकों को वित्तीय सहायता, बाजार विकास और निर्यात संवर्धन से जुड़े अवसरों के बारे में बताया गया। इसका उद्देश्य भारतीय निर्यातकों को वैश्विक बाजारों में अपनी उपस्थिति मजबूत करने में सहायता देना है।
कारीगरों के कौशल विकास और निर्यात को बढ़ावा
ईपीसीएच के कार्यकारी निदेशक राजेश रावत ने कहा कि परिषद कारीगरों और बुनकरों को प्रशिक्षण, कौशल विकास, उत्पाद नवाचार, ब्रांडिंग, मार्केटिंग और ऑर्डर पूरा करने की प्रक्रिया में सहायता प्रदान कर रही है।
इसी दिशा में मेले के दौरान कारीगरों और बुनकरों के लिए विशेष मार्गदर्शन सत्र आयोजित किया गया। इसमें उत्पाद विकास, ब्रांडिंग और विजुअल मर्चेंडाइजिंग पर जोर दिया गया, ताकि भारतीय हस्तशिल्प को वैश्विक बाजारों की जरूरतों के अनुरूप तैयार किया जा सके।
उन्होंने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में भारत से हस्तशिल्प का कुल निर्यात 33,168 करोड़ रुपये (3,754 मिलियन अमेरिकी डॉलर) रहा।
आईएचजीएफ दिल्ली मेला–ऑटम 2026 भारतीय हस्तशिल्प की वैश्विक पहचान मजबूत करने, नए खरीदारों से संपर्क बढ़ाने और निर्यात के अवसरों को विस्तार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। मेले का समापन 17 अक्टूबर को होगा।


