दिल्ली पुलिस के सेवानिवृत्त दरोगा रोहतास सिंह वोहरा ने प्रेस क्लब भारत में सुनाई आपबीती
तेवतिया रियल एस्टेट प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर अजीम पर लगाए धोखाधड़ी के आरोप, मुख्यमंत्री आवास पर आत्मदाह की चेतावनी देकर रकम वापसी और निष्पक्ष जांच की मांग की
ग्रेटर नोएडा। शाहबेरी में प्लॉट खरीदने के लिए लाखों रुपये का भुगतान करने के बावजूद जमीन और पूरी रकम वापस नहीं मिलने का मामला सामने आया है। दिल्ली पुलिस के सेवानिवृत्त दरोगा रोहतास सिंह वोहरा ने तेवतिया रियल एस्टेट प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर अजीम पर धोखाधड़ी करने का आरोप लगाया है। पीड़ित के मुताबिक, वर्ष 2018 में उन्होंने 40 लाख रुपये में प्लॉट खरीदने का सौदा किया था और इसके लिए 36.35 लाख रुपये का भुगतान भी किया। हालांकि, उनका आरोप है कि न तो उन्हें प्लॉट मिला और न ही उनकी पूरी रकम वापस की गई।
अपनी शिकायत को लेकर वर्षों से पुलिस-प्रशासन के चक्कर काट रहे रोहतास सिंह वोहरा बुधवार को ग्रेटर नोएडा के सेक्टर अल्फा-1 स्थित प्रेस क्लब भारत पहुंचे। यहां उन्होंने पत्रकारों के साथ प्रेस वार्ता कर अपनी आपबीती सुनाई। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से मामले की निष्पक्ष जांच कराने और अपनी जमा पूंजी वापस दिलाने की मांग की।
शाहबेरी प्लॉट विवाद: आरटीजीएस से 30 लाख और नकद 6.35 लाख देने का दावा
रोहतास सिंह वोहरा के अनुसार, वर्ष 2018 में उन्होंने शाहबेरी स्थित तेवतिया सिटी, सेक्टर-16बी में खसरा संख्या 302 पर लगभग 400 वर्ग गज का प्लॉट खरीदने के लिए सौदा तय किया था। प्लॉट की कुल कीमत 40 लाख रुपये निर्धारित की गई थी।
पीड़ित का दावा है कि उन्होंने 6 फरवरी 2018 को 10 लाख रुपये और 7 फरवरी 2018 को 20 लाख रुपये आरटीजीएस के माध्यम से कंपनी के खाते में ट्रांसफर किए थे। इसके अतिरिक्त उन्होंने 6 लाख 35 हजार रुपये नकद देने की बात भी कही है।
इस तरह उनके मुताबिक, प्लॉट के लिए कुल 36 लाख 35 हजार रुपये का भुगतान किया गया। शेष 3 लाख 65 हजार रुपये रजिस्ट्री के समय देने की बात थी।
रोहतास सिंह का आरोप है कि भुगतान करने के बाद उन्हें प्लॉट की रजिस्ट्री कराने का आश्वासन दिया गया था। जून 2018 में रजिस्ट्री होने की उम्मीद थी, लेकिन निर्धारित समय पर यह प्रक्रिया पूरी नहीं हुई।
रजिस्ट्री के लिए इंतजार करते रहे, लेकिन नहीं मिला प्लॉट
पीड़ित के मुताबिक, रजिस्ट्री कराने की बात बार-बार टलती रही। हर बार कोई न कोई कारण बताकर उन्हें इंतजार करने के लिए कहा गया।
रोहतास सिंह का कहना है कि उन्होंने प्लॉट खरीदने के लिए अपनी जमा पूंजी लगाई थी। उन्हें उम्मीद थी कि तय शर्तों के अनुसार जमीन उनके नाम हो जाएगी। हालांकि, लंबे समय तक इंतजार करने के बाद भी उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ।
उन्होंने आरोप लगाया कि 23 अप्रैल 2019 को जब वह शेष भुगतान करने के लिए पहुंचे, तो उन्हें बताया गया कि प्लॉट की कीमत दोगुनी हो गई है। पीड़ित के अनुसार, जब उन्होंने पहले से तय कीमत पर प्लॉट देने की बात कही, तो विवाद की स्थिति पैदा हो गई और उन्हें कथित रूप से धमकी भी दी गई।
ये सभी आरोप पीड़ित की ओर से लगाए गए हैं। मामले में संबंधित कंपनी और उसके डायरेक्टर का पक्ष सामने आने पर ही विवाद के दूसरे पहलुओं की जानकारी मिल सकेगी।
पांच लाख रुपये लौटाने के बाद बाकी रकम देने का वादा, लेकिन भुगतान अधूरा
रोहतास सिंह वोहरा ने आरोप लगाया कि विवाद बढ़ने के बाद उनके खाते में पांच लाख रुपये वापस किए गए थे। साथ ही, शेष रकम छह महीने के भीतर लौटाने का आश्वासन दिया गया था।
हालांकि, पीड़ित का दावा है कि निर्धारित समय बीतने के बाद भी उनकी बाकी रकम वापस नहीं की गई। इस कारण उनकी आर्थिक परेशानी लगातार बढ़ती गई।
उनके मुताबिक, उन्होंने अपनी रकम वापस पाने के लिए कई बार संबंधित लोगों से संपर्क किया। इसके बावजूद उन्हें राहत नहीं मिली। अब वह अपनी जमा पूंजी वापस पाने के लिए पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों से कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
दूसरे व्यक्ति को प्लॉट बेचने का भी आरोप
पीड़ित ने यह भी आरोप लगाया कि जिस प्लॉट के लिए उन्होंने भुगतान किया था, उसे बाद में किसी अन्य व्यक्ति को बेच दिया गया। उनका दावा है कि संबंधित स्थान पर अब कॉलोनी भी विकसित हो चुकी है।
यदि प्लॉट के दोहरे आवंटन या बिक्री से संबंधित आरोपों की पुष्टि होती है, तो मामले में संपत्ति के दस्तावेजों, भुगतान के रिकॉर्ड और रजिस्ट्री से जुड़े तथ्यों की जांच महत्वपूर्ण होगी।
फिलहाल, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि के लिए संबंधित दस्तावेजों और दूसरे पक्ष का विवरण सामने आना आवश्यक है।
वर्षों से न्याय की मांग, पत्नी के निधन के बाद बढ़ी परेशानी

रोहतास सिंह के अनुसार, उन्होंने अपनी शिकायत को लेकर थाना प्रभारी, चौकी प्रभारी और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से कई बार संपर्क किया। उनका दावा है कि उन्होंने अलग-अलग स्तरों पर अपनी समस्या रखी, लेकिन अब तक उनकी शिकायत का समाधान नहीं हो सका।
पीड़ित ने बताया कि इस पूरे संघर्ष के दौरान उनके परिवार को भी परेशानियों का सामना करना पड़ा। उनके मुताबिक, 3 मार्च 2026 को उनकी पत्नी का निधन हो गया। इस व्यक्तिगत दुख के बीच अपनी जमा पूंजी वापस पाने के लिए चल रही कानूनी और प्रशासनिक भागदौड़ ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।
उन्होंने प्रेस वार्ता में कहा कि वर्षों तक अधिकारियों के सामने अपनी बात रखने के बावजूद उन्हें राहत नहीं मिली। अब वह चाहते हैं कि उनकी शिकायत पर गंभीरता से विचार किया जाए और भुगतान से जुड़े तथ्यों की जांच कराई जाए।
मुख्यमंत्री आवास पर आत्मदाह की चेतावनी
प्रेस वार्ता के दौरान रोहतास सिंह वोहरा ने अपनी रकम वापस दिलाने और मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि लंबे समय से न्याय की गुहार लगाने के बावजूद उन्हें समाधान नहीं मिला है।
पीड़ित ने मुख्यमंत्री आवास पर आत्मदाह करने की चेतावनी भी दी। उनकी इस चेतावनी से उनकी परेशानी और निराशा का पता चलता है। हालांकि, ऐसे कदम से उनकी जान को गंभीर खतरा हो सकता है। संबंधित प्रशासन को उनकी शिकायत और सुरक्षा से जुड़ी स्थिति पर तत्काल ध्यान देना चाहिए।
मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि बैंक के माध्यम से किए गए भुगतान, नकद राशि देने के दावे, प्लॉट के स्वामित्व और कथित तौर पर रकम लौटाने के आश्वासन से जुड़े तथ्यों की जांच कब होगी।
अब जांच और कार्रवाई पर टिकी पीड़ित की उम्मीदें
रोहतास सिंह वोहरा का मामला संपत्ति खरीदने के सौदे, भुगतान और रजिस्ट्री से जुड़े विवाद की ओर ध्यान आकर्षित करता है। पीड़ित का कहना है कि उन्होंने अपनी मेहनत की कमाई प्लॉट खरीदने के लिए दी थी, लेकिन वर्षों बाद भी उन्हें न जमीन मिली और न ही पूरी रकम वापस हुई।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित पुलिस अधिकारी और प्रशासन उनकी शिकायत पर क्या कार्रवाई करते हैं। साथ ही, कंपनी और उसके डायरेक्टर का पक्ष सामने आना भी जरूरी है, ताकि मामले के सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच हो सके।
पीड़ित की मांग है कि भुगतान से संबंधित रिकॉर्ड की जांच कराई जाए, प्लॉट के लेन-देन से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल हो और नियमानुसार कार्रवाई करते हुए उनकी रकम वापस दिलाने के लिए उचित कदम उठाए जाएं।
फिलहाल, मामले में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित पक्ष का जवाब सामने आना बाकी है।


