Wednesday, October 14, 2026
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श्री धार्मिक रामलीला में बाल लीला, विद्या अभ्यास और ताड़का वध का भव्य मंचन

भगवान श्रीराम की बाल लीलाओं ने मोहा दर्शकों का मन, ताड़का वध के साथ ऋषि-मुनियों को मिला भयमुक्त वातावरण

ग्रेटर नोएडा में रामलीला मंचन के दौरान गूंजे जय श्रीराम के जयकारे, 15 अक्टूबर को होगा सीता स्वयंवर और राम बारात का आयोजन

ग्रेटर नोएडा, 14 अक्टूबर 2026। ग्रेटर नोएडा के पाई 1  स्थित श्री धार्मिक रामलीला परिसर में भव्य रामलीला एवं दशहरा महोत्सव 2026 के अंतर्गत बुधवार को भगवान श्रीराम की बाल लीला, विद्या अभ्यास और ताड़का वध का मनोहारी मंचन किया गया। परम श्रद्धेय गोस्वामी सुशील जी महाराज के दिशा-निर्देशन तथा संस्था के अध्यक्ष श्री आनंद भाटी के मार्गदर्शन में आयोजित रामलीला में कलाकारों ने अपनी शानदार प्रस्तुतियों से दर्शकों का मन मोह लिया। प्रभु श्रीराम और माता सीता के जयकारों से पूरा रामलीला परिसर गूंज उठा।

भगवान श्रीराम की बाल लीलाओं से लेकर ताड़का वध तक का हुआ मंचन

संस्था के अध्यक्ष श्री आनंद भाटी ने बताया कि रामलीला के चौथे दिन की लीला में अयोध्या के राजमहल में भगवान श्रीराम चारों भाइयों के साथ अपनी बाल लीलाओं से महाराज दशरथ, माताओं और अयोध्या की प्रजा को आनंदित करते हैं। इसके बाद चारों भाइयों के गुरु वशिष्ठ के आश्रम में विद्या अभ्यास के लिए जाने का प्रसंग प्रस्तुत किया गया।
लीला के माध्यम से बताया गया कि भगवान श्रीराम स्वयं समस्त विद्याओं के स्वामी हैं, फिर भी उन्होंने मर्यादा पुरुषोत्तम के रूप में मानव जीवन के आदर्शों को स्थापित करने के लिए गुरु के आश्रम में शिक्षा ग्रहण की। गुरु वशिष्ठ के मार्गदर्शन में चारों भाइयों ने विभिन्न विद्याओं का अभ्यास किया। विद्या अर्जित करने के बाद जब चारों भाई अयोध्या लौटे, तो पूरी नगरी में प्रसन्नता का वातावरण छा गया।

ऋषि विश्वामित्र के आगमन से आगे बढ़ी रामलीला

इसके बाद रामलीला में ऋषि विश्वामित्र के अयोध्या आगमन का प्रसंग दिखाया गया। ऋषि विश्वामित्र ने महाराज दशरथ से भगवान श्रीराम और लक्ष्मण को अपने आश्रम ले जाने की इच्छा व्यक्त की, ताकि वे उनके यज्ञ की रक्षा कर सकें।
महाराज दशरथ अपने पुत्रों से अत्यधिक प्रेम करते थे। इसलिए दोनों राजकुमारों को अपने साथ ले जाने की बात सुनकर वे भावुक हो गए। उन्होंने ऋषि विश्वामित्र से आग्रह किया कि वे स्वयं उनके साथ चलने को तैयार हैं, लेकिन बालक राम और लक्ष्मण को अयोध्या में ही रहने दें।
हालांकि, ऋषि विश्वामित्र भगवान श्रीराम के धरती पर अवतरण के उद्देश्य से परिचित थे। उन्होंने महाराज दशरथ को समझाया और भगवान राम तथा लक्ष्मण को अपने साथ आश्रम ले गए।

भगवान श्रीराम ने किया ताड़का का वध

रामलीला के अगले दृश्य में भगवान श्रीराम और लक्ष्मण के ऋषि विश्वामित्र के आश्रम पहुंचने का प्रसंग दिखाया गया। वहां राक्षसों के आतंक के कारण ऋषि-मुनियों को यज्ञ, हवन और धार्मिक अनुष्ठान करने में बाधाओं का सामना करना पड़ रहा था।
भगवान श्रीराम ने ऋषि विश्वामित्र के यज्ञ की रक्षा के लिए राक्षसी शक्तियों का सामना किया। इसके बाद ताड़का के साथ हुए भीषण युद्ध का मंचन किया गया। अंततः भगवान श्रीराम ने ताड़का का वध कर ऋषि-मुनियों को भयमुक्त वातावरण प्रदान किया।
इस दृश्य के दौरान दर्शकों ने भगवान श्रीराम के जयकारे लगाए। कलाकारों की प्रस्तुति और युद्ध के दृश्यों ने रामलीला को विशेष आकर्षण प्रदान किया।

अहिल्या उद्धार और जनकपुर प्रस्थान के प्रसंग ने मोहा मन

ताड़का वध के बाद रामलीला में ऋषि विश्वामित्र के साथ भगवान श्रीराम और लक्ष्मण की आगे की यात्रा का प्रसंग प्रस्तुत किया गया। इसी दौरान मिथिला के राजा जनक की ओर से सीता स्वयंवर का आमंत्रण मिलने की कथा दिखाई गई।
ऋषि विश्वामित्र दोनों राजकुमारों को लेकर जनकपुर के लिए प्रस्थान करते हैं। मार्ग में वे ऋषि गौतम की पत्नी अहिल्या के आश्रम पहुंचते हैं। शाप के कारण शिला बनी अहिल्या का भगवान श्रीराम के चरण-स्पर्श से उद्धार होता है। यह प्रसंग भक्ति, आस्था और भगवान की कृपा का संदेश देता है।
इसके बाद भगवान श्रीराम और लक्ष्मण ऋषि विश्वामित्र के साथ जनकपुर पहुंचते हैं। वहां ऋषि के पूजन के लिए पुष्पों की आवश्यकता होने पर दोनों राजकुमार वाटिका की ओर जाते हैं।

भगवान श्रीराम और माता सीता के प्रथम मिलन का मनोहारी प्रसंग

रामलीला के दौरान भगवान श्रीराम और माता सीता के प्रथम मिलन का प्रसंग भी दर्शाया गया। वाटिका में भगवान श्रीराम और माता सीता का एक-दूसरे को देखना दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण रहा।
इस दृश्य में माता सीता के स्वरूप में माता लक्ष्मी और भगवान श्रीराम के दिव्य स्वरूप की महिमा को मंच पर दर्शाया गया। कलाकारों ने भावपूर्ण अभिनय के माध्यम से इस प्रसंग को जीवंत बनाया।
रामलीला के इन सभी प्रसंगों ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। पूरे परिसर में धार्मिक उत्साह का वातावरण रहा और भगवान श्रीराम के जयकारों से आयोजन स्थल गूंजता रहा।

15 अक्टूबर को होगा सीता स्वयंवर और राम बारात का आयोजन

श्री धार्मिक रामलीला एवं दशहरा महोत्सव 11 अक्टूबर से 20 अक्टूबर 2026 तक प्रतिदिन शाम 7 बजे आयोजित किया जा रहा है। आयोजकों के अनुसार, आगामी दिनों में रामलीला के कई महत्वपूर्ण प्रसंगों का मंचन किया जाएगा।
आगामी कार्यक्रमों की प्रमुख झलकियां इस प्रकार हैं:
15 अक्टूबर: सीता स्वयंवर, राम बारात, कैकेयी-मंथरा संवाद, राम वनवास और चित्रकूट के प्रसंग।
16 अक्टूबर: ऋषि मिलन, पंचवटी, शूर्पणखा प्रसंग, सीता हरण और जटायु वध।
17 अक्टूबर: राम-भरत मिलाप, शबरी प्रसंग, राम-हनुमान मिलन, किष्किंधा, बाली वध और अशोक वाटिका के प्रसंग।
18 अक्टूबर: लंका दहन, सेतु निर्माण और रावण-अंगद संवाद।
19 अक्टूबर: लक्ष्मण-मेघनाद युद्ध तथा भगवान श्रीराम और रावण के बीच युद्ध से जुड़े प्रसंग।
आयोजकों ने बताया कि इस वर्ष का दशहरा महोत्सव और रामलीला मंचन क्षेत्रवासियों के लिए आनंददायक और यादगार आयोजन बनाने के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है। रामलीला के माध्यम से नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, धार्मिक परंपराओं और मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के आदर्शों से परिचित कराने का प्रयास किया जा रहा है।

भाजपा प्रदेश मंत्री महामेधा नागर सहित गणमान्य अतिथि होंगे शामिल

आयोजन के दौरान विभिन्न अतिथियों की उपस्थिति भी प्रस्तावित है। प्रमुख अतिथियों में भाजपा उत्तर प्रदेश की प्रदेश मंत्री महामेधा नागर, अखिल भारतीय गुर्जर महासभा के राष्ट्रीय सचिव श्री पंकज रौसा और श्री मनोज गुप्ता शामिल हैं।
संस्था की ओर से रामलीला को सफल बनाने के लिए सभी पदाधिकारियों, सदस्यों, कलाकारों और सहयोगियों के योगदान की सराहना की गई।

संस्था के पदाधिकारी और सदस्य रहे उपस्थित

इस अवसर पर संस्था के संस्थापक गोस्वामी सुशील जी महाराज, संस्थापक श्री राजकुमार नागर, श्री प्रदीप शर्मा, श्री शेर सिंह भाटी, श्री हरवीर मावी, मुख्य संरक्षक श्री नरेश गुप्ता, संरक्षक श्री सुशील नागर, श्री धीरेंद्र भाटी, श्री धीरज शर्मा, श्री बालकिशन सफीपुर, श्री दिनेश गुप्ता, श्री पवन नागर, श्री मनोज गुप्ता, श्री सतीश भाटी, अध्यक्ष श्री आनंद भाटी, महासचिव श्रीमती ममता तिवारी, कोषाध्यक्ष श्री अजय नागर, वरिष्ठ उपाध्यक्ष श्री महेश शर्मा बदौली, श्री उमेश गौतम, श्री सत्यवीर मुखिया, श्रीमती रोशनी सिंह, श्री महेश कमांडो, श्री चैन पाल प्रधान, श्री जितेंद्र भाटी, श्री सुभाष भाटी, श्री मनीष डाबर, मीडिया प्रभारी श्री अतुल आनंद, उपाध्यक्ष श्री फिरे प्रधान, श्री पी.पी. शर्मा, श्री श्याम सुंदर फौजी, श्री यशपाल नागर, सचिव श्रीमती ज्योति सिंह, श्रीमती गीता शागर, श्री राकेश भाटी, श्री भगवत भाटी, श्री तेज कुमार भाटी, श्री सुंदर भाटी, श्री पवन भाटी, श्री वीरपाल मावी और श्री जय शर्मा सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
आयोजकों ने क्षेत्रवासियों से आगामी रामलीला मंचन में अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजन का हिस्सा बनने की अपील की।

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श्री धार्मिक रामलीला में बाल लीला, विद्या अभ्यास और ताड़का वध का भव्य मंचन

भगवान श्रीराम की बाल लीलाओं ने मोहा दर्शकों का मन, ताड़का वध के साथ ऋषि-मुनियों को मिला भयमुक्त वातावरण

ग्रेटर नोएडा में रामलीला मंचन के दौरान गूंजे जय श्रीराम के जयकारे, 15 अक्टूबर को होगा सीता स्वयंवर और राम बारात का आयोजन

ग्रेटर नोएडा, 14 अक्टूबर 2026। ग्रेटर नोएडा के पाई 1  स्थित श्री धार्मिक रामलीला परिसर में भव्य रामलीला एवं दशहरा महोत्सव 2026 के अंतर्गत बुधवार को भगवान श्रीराम की बाल लीला, विद्या अभ्यास और ताड़का वध का मनोहारी मंचन किया गया। परम श्रद्धेय गोस्वामी सुशील जी महाराज के दिशा-निर्देशन तथा संस्था के अध्यक्ष श्री आनंद भाटी के मार्गदर्शन में आयोजित रामलीला में कलाकारों ने अपनी शानदार प्रस्तुतियों से दर्शकों का मन मोह लिया। प्रभु श्रीराम और माता सीता के जयकारों से पूरा रामलीला परिसर गूंज उठा।

भगवान श्रीराम की बाल लीलाओं से लेकर ताड़का वध तक का हुआ मंचन

संस्था के अध्यक्ष श्री आनंद भाटी ने बताया कि रामलीला के चौथे दिन की लीला में अयोध्या के राजमहल में भगवान श्रीराम चारों भाइयों के साथ अपनी बाल लीलाओं से महाराज दशरथ, माताओं और अयोध्या की प्रजा को आनंदित करते हैं। इसके बाद चारों भाइयों के गुरु वशिष्ठ के आश्रम में विद्या अभ्यास के लिए जाने का प्रसंग प्रस्तुत किया गया।
लीला के माध्यम से बताया गया कि भगवान श्रीराम स्वयं समस्त विद्याओं के स्वामी हैं, फिर भी उन्होंने मर्यादा पुरुषोत्तम के रूप में मानव जीवन के आदर्शों को स्थापित करने के लिए गुरु के आश्रम में शिक्षा ग्रहण की। गुरु वशिष्ठ के मार्गदर्शन में चारों भाइयों ने विभिन्न विद्याओं का अभ्यास किया। विद्या अर्जित करने के बाद जब चारों भाई अयोध्या लौटे, तो पूरी नगरी में प्रसन्नता का वातावरण छा गया।

ऋषि विश्वामित्र के आगमन से आगे बढ़ी रामलीला

इसके बाद रामलीला में ऋषि विश्वामित्र के अयोध्या आगमन का प्रसंग दिखाया गया। ऋषि विश्वामित्र ने महाराज दशरथ से भगवान श्रीराम और लक्ष्मण को अपने आश्रम ले जाने की इच्छा व्यक्त की, ताकि वे उनके यज्ञ की रक्षा कर सकें।
महाराज दशरथ अपने पुत्रों से अत्यधिक प्रेम करते थे। इसलिए दोनों राजकुमारों को अपने साथ ले जाने की बात सुनकर वे भावुक हो गए। उन्होंने ऋषि विश्वामित्र से आग्रह किया कि वे स्वयं उनके साथ चलने को तैयार हैं, लेकिन बालक राम और लक्ष्मण को अयोध्या में ही रहने दें।
हालांकि, ऋषि विश्वामित्र भगवान श्रीराम के धरती पर अवतरण के उद्देश्य से परिचित थे। उन्होंने महाराज दशरथ को समझाया और भगवान राम तथा लक्ष्मण को अपने साथ आश्रम ले गए।

भगवान श्रीराम ने किया ताड़का का वध

रामलीला के अगले दृश्य में भगवान श्रीराम और लक्ष्मण के ऋषि विश्वामित्र के आश्रम पहुंचने का प्रसंग दिखाया गया। वहां राक्षसों के आतंक के कारण ऋषि-मुनियों को यज्ञ, हवन और धार्मिक अनुष्ठान करने में बाधाओं का सामना करना पड़ रहा था।
भगवान श्रीराम ने ऋषि विश्वामित्र के यज्ञ की रक्षा के लिए राक्षसी शक्तियों का सामना किया। इसके बाद ताड़का के साथ हुए भीषण युद्ध का मंचन किया गया। अंततः भगवान श्रीराम ने ताड़का का वध कर ऋषि-मुनियों को भयमुक्त वातावरण प्रदान किया।
इस दृश्य के दौरान दर्शकों ने भगवान श्रीराम के जयकारे लगाए। कलाकारों की प्रस्तुति और युद्ध के दृश्यों ने रामलीला को विशेष आकर्षण प्रदान किया।

अहिल्या उद्धार और जनकपुर प्रस्थान के प्रसंग ने मोहा मन

ताड़का वध के बाद रामलीला में ऋषि विश्वामित्र के साथ भगवान श्रीराम और लक्ष्मण की आगे की यात्रा का प्रसंग प्रस्तुत किया गया। इसी दौरान मिथिला के राजा जनक की ओर से सीता स्वयंवर का आमंत्रण मिलने की कथा दिखाई गई।
ऋषि विश्वामित्र दोनों राजकुमारों को लेकर जनकपुर के लिए प्रस्थान करते हैं। मार्ग में वे ऋषि गौतम की पत्नी अहिल्या के आश्रम पहुंचते हैं। शाप के कारण शिला बनी अहिल्या का भगवान श्रीराम के चरण-स्पर्श से उद्धार होता है। यह प्रसंग भक्ति, आस्था और भगवान की कृपा का संदेश देता है।
इसके बाद भगवान श्रीराम और लक्ष्मण ऋषि विश्वामित्र के साथ जनकपुर पहुंचते हैं। वहां ऋषि के पूजन के लिए पुष्पों की आवश्यकता होने पर दोनों राजकुमार वाटिका की ओर जाते हैं।

भगवान श्रीराम और माता सीता के प्रथम मिलन का मनोहारी प्रसंग

रामलीला के दौरान भगवान श्रीराम और माता सीता के प्रथम मिलन का प्रसंग भी दर्शाया गया। वाटिका में भगवान श्रीराम और माता सीता का एक-दूसरे को देखना दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण रहा।
इस दृश्य में माता सीता के स्वरूप में माता लक्ष्मी और भगवान श्रीराम के दिव्य स्वरूप की महिमा को मंच पर दर्शाया गया। कलाकारों ने भावपूर्ण अभिनय के माध्यम से इस प्रसंग को जीवंत बनाया।
रामलीला के इन सभी प्रसंगों ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। पूरे परिसर में धार्मिक उत्साह का वातावरण रहा और भगवान श्रीराम के जयकारों से आयोजन स्थल गूंजता रहा।

15 अक्टूबर को होगा सीता स्वयंवर और राम बारात का आयोजन

श्री धार्मिक रामलीला एवं दशहरा महोत्सव 11 अक्टूबर से 20 अक्टूबर 2026 तक प्रतिदिन शाम 7 बजे आयोजित किया जा रहा है। आयोजकों के अनुसार, आगामी दिनों में रामलीला के कई महत्वपूर्ण प्रसंगों का मंचन किया जाएगा।
आगामी कार्यक्रमों की प्रमुख झलकियां इस प्रकार हैं:
15 अक्टूबर: सीता स्वयंवर, राम बारात, कैकेयी-मंथरा संवाद, राम वनवास और चित्रकूट के प्रसंग।
16 अक्टूबर: ऋषि मिलन, पंचवटी, शूर्पणखा प्रसंग, सीता हरण और जटायु वध।
17 अक्टूबर: राम-भरत मिलाप, शबरी प्रसंग, राम-हनुमान मिलन, किष्किंधा, बाली वध और अशोक वाटिका के प्रसंग।
18 अक्टूबर: लंका दहन, सेतु निर्माण और रावण-अंगद संवाद।
19 अक्टूबर: लक्ष्मण-मेघनाद युद्ध तथा भगवान श्रीराम और रावण के बीच युद्ध से जुड़े प्रसंग।
आयोजकों ने बताया कि इस वर्ष का दशहरा महोत्सव और रामलीला मंचन क्षेत्रवासियों के लिए आनंददायक और यादगार आयोजन बनाने के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है। रामलीला के माध्यम से नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, धार्मिक परंपराओं और मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के आदर्शों से परिचित कराने का प्रयास किया जा रहा है।

भाजपा प्रदेश मंत्री महामेधा नागर सहित गणमान्य अतिथि होंगे शामिल

आयोजन के दौरान विभिन्न अतिथियों की उपस्थिति भी प्रस्तावित है। प्रमुख अतिथियों में भाजपा उत्तर प्रदेश की प्रदेश मंत्री महामेधा नागर, अखिल भारतीय गुर्जर महासभा के राष्ट्रीय सचिव श्री पंकज रौसा और श्री मनोज गुप्ता शामिल हैं।
संस्था की ओर से रामलीला को सफल बनाने के लिए सभी पदाधिकारियों, सदस्यों, कलाकारों और सहयोगियों के योगदान की सराहना की गई।

संस्था के पदाधिकारी और सदस्य रहे उपस्थित

इस अवसर पर संस्था के संस्थापक गोस्वामी सुशील जी महाराज, संस्थापक श्री राजकुमार नागर, श्री प्रदीप शर्मा, श्री शेर सिंह भाटी, श्री हरवीर मावी, मुख्य संरक्षक श्री नरेश गुप्ता, संरक्षक श्री सुशील नागर, श्री धीरेंद्र भाटी, श्री धीरज शर्मा, श्री बालकिशन सफीपुर, श्री दिनेश गुप्ता, श्री पवन नागर, श्री मनोज गुप्ता, श्री सतीश भाटी, अध्यक्ष श्री आनंद भाटी, महासचिव श्रीमती ममता तिवारी, कोषाध्यक्ष श्री अजय नागर, वरिष्ठ उपाध्यक्ष श्री महेश शर्मा बदौली, श्री उमेश गौतम, श्री सत्यवीर मुखिया, श्रीमती रोशनी सिंह, श्री महेश कमांडो, श्री चैन पाल प्रधान, श्री जितेंद्र भाटी, श्री सुभाष भाटी, श्री मनीष डाबर, मीडिया प्रभारी श्री अतुल आनंद, उपाध्यक्ष श्री फिरे प्रधान, श्री पी.पी. शर्मा, श्री श्याम सुंदर फौजी, श्री यशपाल नागर, सचिव श्रीमती ज्योति सिंह, श्रीमती गीता शागर, श्री राकेश भाटी, श्री भगवत भाटी, श्री तेज कुमार भाटी, श्री सुंदर भाटी, श्री पवन भाटी, श्री वीरपाल मावी और श्री जय शर्मा सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
आयोजकों ने क्षेत्रवासियों से आगामी रामलीला मंचन में अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजन का हिस्सा बनने की अपील की।

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