Sunday, October 18, 2026
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105 देशों के खरीदारों की भागीदारी के साथ आईएचजीएफ दिल्ली फेयर–ऑटम 2026 का समापन, ₹3,600 करोड़ की व्यावसायिक पूछताछ

ग्रेटर नोएडा में पांच दिवसीय मेले में पहुंचे करीब 7,350 खरीदार और बाइंग प्रतिनिधि

3,000 से अधिक प्रदर्शकों ने पेश किए भारतीय हस्तशिल्प, होम डेकोर और लाइफस्टाइल उत्पाद; 12 श्रेणियों में दिए गए अजय शंकर मेमोरियल अवॉर्ड

आईएचजीएफ दिल्ली फेयर 2026 में 105 देशों के खरीदारों की भागीदारी

ग्रेटर नोएडा। भारत के हस्तशिल्प, होम डेकोर और लाइफस्टाइल उत्पादों को वैश्विक बाजार से जोड़ने वाला 62वां आईएचजीएफ दिल्ली फेयर–ऑटम 2026 शनिवार, 17 अक्टूबर को इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट, ग्रेटर नोएडा में संपन्न हो गया। 13 से 17 अक्टूबर तक आयोजित इस पांच दिवसीय मेले में 105 देशों से करीब 7,350 खरीदारों, बाइंग प्रतिनिधियों और घरेलू बड़े खरीदारों ने भाग लिया। आयोजकों के अनुसार, मेले के दौरान लगभग 3,600 करोड़ रुपये की व्यावसायिक पूछताछ प्राप्त हुई। इस आयोजन में देशभर के निर्यातकों ने अपने उत्पादों और नई डिजाइन श्रृंखलाओं को अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के सामने प्रस्तुत किया।
मेले में नियमित खरीदारों के साथ बड़ी संख्या में नए आगंतुक भी पहुंचे। खरीदारों ने भारतीय हस्तशिल्प की विविधता, उत्पादों की गुणवत्ता, आधुनिक डिजाइन और आपूर्तिकर्ताओं के साथ व्यावसायिक साझेदारी की संभावनाओं में रुचि दिखाई। कई खरीदार ऑर्डर देकर लौटे, जबकि कुछ के साथ कारोबारी बातचीत अंतिम चरण में पहुंची। समापन के अवसर पर प्रदर्शकों और खरीदारों ने मार्च 2027 में प्रस्तावित स्प्रिंग संस्करण में दोबारा मिलने की उम्मीद जताई।

17 हॉल, 3,000 से अधिक प्रदर्शक और 900 स्थायी शोरूम बने आकर्षण

आईएचजीएफ दिल्ली फेयर–ऑटम 2026 में 17 समर्पित प्रदर्शनी हॉलों में 3,000 से अधिक प्रदर्शकों ने भाग लिया। यहां होम डेकोर, लाइफस्टाइल, फैशन, फर्निशिंग, फर्नीचर, गिफ्ट्स, इंटीरियर उत्पादों और हस्तनिर्मित वस्तुओं की विस्तृत श्रृंखला प्रदर्शित की गई। इसके अतिरिक्त, इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट के विभिन्न स्तरों पर स्थित करीब 900 स्थायी शोरूम भी खरीदारों के लिए तैयार किए गए थे।
इस व्यापक व्यवस्था ने विदेशी खरीदारों को एक ही स्थान पर विभिन्न उत्पाद श्रेणियों, डिजाइन विकल्पों और संभावित आपूर्तिकर्ताओं को देखने का अवसर दिया। पारंपरिक हस्तशिल्प के साथ आधुनिक उपयोग के अनुरूप तैयार किए गए उत्पाद भी आकर्षण का केंद्र रहे।

डॉ. नीरज खन्ना बोले—अगले संस्करण को और ऊंचे स्तर पर ले जाने की तैयारी

ईपीसीएच के अध्यक्ष डॉ. नीरज खन्ना ने मेले के सफल आयोजन पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस संस्करण में प्रदर्शनी का व्यापक स्वरूप और बेहतर प्रस्तुति देखने को मिली। आयोजकों, प्रदर्शकों और हस्तशिल्प क्षेत्र से जुड़े लोगों ने मिलकर आयोजन के स्तर को बेहतर बनाने का प्रयास किया।
उन्होंने बताया कि खरीदारों ने 3,000 से अधिक प्रदर्शकों और कारीगर-उद्यमियों से संवाद किया। क्षेत्रीय विशेषताओं वाले उत्पादों के साथ कौशल विकास और डिजाइन आधारित पहलों से तैयार वस्तुओं को भी सराहना मिली।
डॉ. खन्ना के अनुसार, मार्च 2027 में होने वाले अगले संस्करण को और बेहतर बनाने की तैयारी की जाएगी। मेले में आए खरीदारों ने भारतीय आपूर्तिकर्ताओं के साथ अपने संबंध आगे बढ़ाने और आगामी आयोजन में फिर शामिल होने की इच्छा जताई।

डॉ. राकेश कुमार ने भारतीय हस्तशिल्प की वैश्विक मांग पर रखी बात

ईपीसीएच के महानिदेशक की भूमिका में मुख्य संरक्षक और आईईएमएल के अध्यक्ष डॉ. राकेश कुमार ने कहा कि भारतीय हस्तशिल्प अपनी सांस्कृतिक विरासत को बनाए रखते हुए आधुनिक डिजाइन पहचान विकसित कर रहे हैं। वैश्विक बाजार में आपूर्ति श्रृंखलाओं के विविधीकरण की प्रवृत्ति के बीच भारत एक महत्वपूर्ण सोर्सिंग केंद्र के रूप में उभर रहा है।
उन्होंने बताया कि कई अंतरराष्ट्रीय थोक विक्रेता और खुदरा कंपनियां भारत से खरीद बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही हैं। कुछ खरीदारों के कुल आयात में भारतीय निर्माताओं की हिस्सेदारी 40 से 80 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। यह रुझान भारतीय उत्पादकों के लिए नए कारोबारी अवसरों का संकेत देता है।

जर्मनी, अमेरिका और फ्रांस के खरीदारों ने साझा किए अनुभव

मेले में पहुंचे अंतरराष्ट्रीय खरीदारों ने भारतीय उत्पादों और सोर्सिंग सुविधाओं को लेकर अपने अनुभव साझा किए।

जर्मनी से आए पीटर ज़ूर्न पिछले 14 वर्षों से आईएचजीएफ दिल्ली फेयर में नियमित रूप से शामिल हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि यह आयोजन नए संग्रह तलाशने, इंटीरियर डेकोर उत्पादों को देखने और आपूर्तिकर्ताओं के साथ संबंध मजबूत करने का महत्वपूर्ण माध्यम है। उनकी कंपनी के आयात में भारत की हिस्सेदारी लगभग 50 प्रतिशत है।
अमेरिका के कैलिफोर्निया से आए स्कॉट ने मेले के आकार और उत्पादों की विविधता की सराहना की। उनकी विशेष रुचि संगमरमर, पीतल और एल्युमीनियम से बने होम डेकोर उत्पादों में रही। उन्होंने बताया कि उनके आयात में भारतीय उत्पादों की हिस्सेदारी करीब 85 प्रतिशत है।
अमेरिका से आईं डीन ऐशले टी. लिन ने होम डेकोर, वस्त्र, पिलो कवर, बेडशीट और सजावटी उत्पादों में रुचि दिखाई। वहीं, फ्रांस से पहली बार आईं एमिल ने टेबलवेयर, लकड़ी और लोहे से बने उत्पादों तथा फर्नीचर की सोर्सिंग में दिलचस्पी व्यक्त की। उन्होंने बताया कि उनके आयात में भारत की हिस्सेदारी फिलहाल लगभग 15 प्रतिशत है और वह इसे बढ़ाने के लिए नए आपूर्तिकर्ताओं की तलाश कर रही हैं।
इन अनुभवों से पता चलता है कि भारतीय हस्तशिल्प और घरेलू सजावट से जुड़े उत्पाद विभिन्न अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अलग-अलग जरूरतों के अनुरूप अवसर प्रदान कर रहे हैं।

कई देशों के प्रमुख ब्रांडों के सोर्सिंग प्रतिनिधि पहुंचे

ईपीसीएच के कार्यकारी निदेशक श्री राजेश रावत ने बताया कि मेले में अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया, नीदरलैंड्स, स्पेन, जापान, चीन और दक्षिण अफ्रीका सहित कई देशों से खरीदार पहुंचे।
प्रमुख अंतरराष्ट्रीय कंपनियों और खुदरा ब्रांडों के सोर्सिंग प्रतिनिधियों ने भी आयोजन में भाग लिया। इनमें ग्रुप 2 लुट्ज़, ऑस्ट्रिया; ए-जेड जीआईएस इंक, कनाडा; मैसन्स डू मोंडे, फ्रांस; मैसिवमोएबेल24 जीएमबीएच, जर्मनी; निटोरी, जापान; लैंडमार्क ग्रुप, यूएई; फैबलरूम और डिज़ाइन्ड बाय वूल्फ, ब्रिटेन; तथा रॉस स्टोर्स, टीजेएक्स कंपनीज़ और वीसीएनव्हाई होम, अमेरिका शामिल हैं।
श्री रावत के अनुसार, पांच दिनों में प्राप्त लगभग 3,600 करोड़ रुपये की व्यावसायिक पूछताछ आयोजन की कारोबारी गतिविधियों का महत्वपूर्ण संकेत है। हालांकि, व्यावसायिक पूछताछ का आंकड़ा वास्तविक रूप से पूरे हुए ऑर्डर या अंतिम बिक्री के बराबर नहीं होता।

केंद्र और स्थानीय प्रशासन के अधिकारियों ने भी किया दौरा

मेले में कई गणमान्य व्यक्तियों और वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। इनमें भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं पूर्व राज्यसभा सांसद सैयद ज़फ़र इस्लाम, केंद्रीय कपड़ा मंत्रालय की सचिव नीलम शामी राव, मंत्रालय की अतिरिक्त सचिव आरती कंवर, हस्तशिल्प विकास आयुक्त अमृत राज, गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस के अतिरिक्त सीईओ अजीत चव्हाण और ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रवि कुमार एन. जी. शामिल रहे।
इसके अलावा, गुजरात सरकार की पूर्व अतिरिक्त मुख्य सचिव सुनैना तोमर और खान मंत्रालय के संयुक्त सचिव विवेक कुमार बाजपेयी ने भी मेले का दौरा किया।
ईपीसीएच के उपाध्यक्ष श्री सागर मेहता ने बताया कि आगंतुकों ने मेले की व्यवस्था और प्रदर्शनी की सराहना की। उन्होंने प्रदर्शकों को उत्पाद नवाचार, बदलती बाजार प्राथमिकताओं और वैश्विक ग्राहकों की मांग के अनुरूप अपने उत्पाद विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया।

12 श्रेणियों में दिए गए अजय शंकर मेमोरियल अवॉर्ड

मेले के समापन समारोह में सर्वश्रेष्ठ स्टैंड डिजाइन और डिस्प्ले के लिए पुरस्कार प्रदान किए गए। प्रदर्शकों की रचनात्मकता और प्रस्तुति को सम्मानित करने के लिए 12 श्रेणियों में अजय शंकर मेमोरियल अवॉर्ड और पी. एन. सूरी मेमोरियल अवॉर्ड दिए गए।
अजय शंकर मेमोरियल अवॉर्ड में लैंप, लाइटिंग और एक्सेसरीज; होम टेक्सटाइल, फर्निशिंग और फ्लोर कवरिंग; फैशन ज्वेलरी और एक्सेसरीज; कॉर्पोरेट एवं सजावटी गिफ्ट्स; बाथरूम एक्सेसरीज; कैंडल, अगरबत्ती, पॉटपुरी और सुगंधित उत्पाद; हैंडमेड पेपर, गिफ्ट रैप, रिबन और सॉफ्ट टॉयज; तथा टिकाऊ उत्पादों जैसी श्रेणियों को शामिल किया गया।
वहीं, पी. एन. सूरी मेमोरियल अवॉर्ड हाउसवेयर, टेबल एवं सजावटी उत्पादों तथा फर्नीचर, फर्नीचर हार्डवेयर और होम एक्सेसरीज की श्रेणियों में दिए गए। इन पुरस्कारों का उद्देश्य प्रदर्शकों के उत्कृष्ट स्टैंड डिजाइन, रचनात्मक प्रदर्शन और उत्पाद प्रस्तुति को प्रोत्साहित करना है।

भारतीय हस्तशिल्प निर्यात का आंकड़ा 33,168 करोड़ रुपये

ईपीसीएच देश से विभिन्न अंतरराष्ट्रीय बाजारों में हस्तशिल्प निर्यात को बढ़ावा देने और भारत को उच्च गुणवत्ता वाले हस्तनिर्मित उत्पादों के विश्वसनीय आपूर्तिकर्ता के रूप में स्थापित करने की दिशा में काम करता है।
ईपीसीएच के कार्यकारी निदेशक श्री राजेश रावत के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान भारत से हस्तशिल्प का कुल निर्यात 33,168 करोड़ रुपये यानी 3,754 मिलियन अमेरिकी डॉलर रहा।
आईएचजीएफ दिल्ली फेयर–ऑटम 2026 के समापन के साथ भारतीय निर्यातकों को अंतरराष्ट्रीय खरीदारों से जुड़ने, नए बाजारों की मांग समझने और दीर्घकालिक कारोबारी संबंध विकसित करने का एक और अवसर मिला। अब उद्योग जगत की नजर मार्च 2027 में होने वाले अगले संस्करण पर रहेगी, जहां नए उत्पादों, डिजाइन और सोर्सिंग अवसरों के साथ कारोबार को आगे बढ़ाने की उम्मीद है।

 

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105 देशों के खरीदारों की भागीदारी के साथ आईएचजीएफ दिल्ली फेयर–ऑटम 2026 का समापन, ₹3,600 करोड़ की व्यावसायिक पूछताछ

ग्रेटर नोएडा में पांच दिवसीय मेले में पहुंचे करीब 7,350 खरीदार और बाइंग प्रतिनिधि

3,000 से अधिक प्रदर्शकों ने पेश किए भारतीय हस्तशिल्प, होम डेकोर और लाइफस्टाइल उत्पाद; 12 श्रेणियों में दिए गए अजय शंकर मेमोरियल अवॉर्ड

आईएचजीएफ दिल्ली फेयर 2026 में 105 देशों के खरीदारों की भागीदारी

ग्रेटर नोएडा। भारत के हस्तशिल्प, होम डेकोर और लाइफस्टाइल उत्पादों को वैश्विक बाजार से जोड़ने वाला 62वां आईएचजीएफ दिल्ली फेयर–ऑटम 2026 शनिवार, 17 अक्टूबर को इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट, ग्रेटर नोएडा में संपन्न हो गया। 13 से 17 अक्टूबर तक आयोजित इस पांच दिवसीय मेले में 105 देशों से करीब 7,350 खरीदारों, बाइंग प्रतिनिधियों और घरेलू बड़े खरीदारों ने भाग लिया। आयोजकों के अनुसार, मेले के दौरान लगभग 3,600 करोड़ रुपये की व्यावसायिक पूछताछ प्राप्त हुई। इस आयोजन में देशभर के निर्यातकों ने अपने उत्पादों और नई डिजाइन श्रृंखलाओं को अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के सामने प्रस्तुत किया।
मेले में नियमित खरीदारों के साथ बड़ी संख्या में नए आगंतुक भी पहुंचे। खरीदारों ने भारतीय हस्तशिल्प की विविधता, उत्पादों की गुणवत्ता, आधुनिक डिजाइन और आपूर्तिकर्ताओं के साथ व्यावसायिक साझेदारी की संभावनाओं में रुचि दिखाई। कई खरीदार ऑर्डर देकर लौटे, जबकि कुछ के साथ कारोबारी बातचीत अंतिम चरण में पहुंची। समापन के अवसर पर प्रदर्शकों और खरीदारों ने मार्च 2027 में प्रस्तावित स्प्रिंग संस्करण में दोबारा मिलने की उम्मीद जताई।

17 हॉल, 3,000 से अधिक प्रदर्शक और 900 स्थायी शोरूम बने आकर्षण

आईएचजीएफ दिल्ली फेयर–ऑटम 2026 में 17 समर्पित प्रदर्शनी हॉलों में 3,000 से अधिक प्रदर्शकों ने भाग लिया। यहां होम डेकोर, लाइफस्टाइल, फैशन, फर्निशिंग, फर्नीचर, गिफ्ट्स, इंटीरियर उत्पादों और हस्तनिर्मित वस्तुओं की विस्तृत श्रृंखला प्रदर्शित की गई। इसके अतिरिक्त, इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट के विभिन्न स्तरों पर स्थित करीब 900 स्थायी शोरूम भी खरीदारों के लिए तैयार किए गए थे।
इस व्यापक व्यवस्था ने विदेशी खरीदारों को एक ही स्थान पर विभिन्न उत्पाद श्रेणियों, डिजाइन विकल्पों और संभावित आपूर्तिकर्ताओं को देखने का अवसर दिया। पारंपरिक हस्तशिल्प के साथ आधुनिक उपयोग के अनुरूप तैयार किए गए उत्पाद भी आकर्षण का केंद्र रहे।

डॉ. नीरज खन्ना बोले—अगले संस्करण को और ऊंचे स्तर पर ले जाने की तैयारी

ईपीसीएच के अध्यक्ष डॉ. नीरज खन्ना ने मेले के सफल आयोजन पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस संस्करण में प्रदर्शनी का व्यापक स्वरूप और बेहतर प्रस्तुति देखने को मिली। आयोजकों, प्रदर्शकों और हस्तशिल्प क्षेत्र से जुड़े लोगों ने मिलकर आयोजन के स्तर को बेहतर बनाने का प्रयास किया।
उन्होंने बताया कि खरीदारों ने 3,000 से अधिक प्रदर्शकों और कारीगर-उद्यमियों से संवाद किया। क्षेत्रीय विशेषताओं वाले उत्पादों के साथ कौशल विकास और डिजाइन आधारित पहलों से तैयार वस्तुओं को भी सराहना मिली।
डॉ. खन्ना के अनुसार, मार्च 2027 में होने वाले अगले संस्करण को और बेहतर बनाने की तैयारी की जाएगी। मेले में आए खरीदारों ने भारतीय आपूर्तिकर्ताओं के साथ अपने संबंध आगे बढ़ाने और आगामी आयोजन में फिर शामिल होने की इच्छा जताई।

डॉ. राकेश कुमार ने भारतीय हस्तशिल्प की वैश्विक मांग पर रखी बात

ईपीसीएच के महानिदेशक की भूमिका में मुख्य संरक्षक और आईईएमएल के अध्यक्ष डॉ. राकेश कुमार ने कहा कि भारतीय हस्तशिल्प अपनी सांस्कृतिक विरासत को बनाए रखते हुए आधुनिक डिजाइन पहचान विकसित कर रहे हैं। वैश्विक बाजार में आपूर्ति श्रृंखलाओं के विविधीकरण की प्रवृत्ति के बीच भारत एक महत्वपूर्ण सोर्सिंग केंद्र के रूप में उभर रहा है।
उन्होंने बताया कि कई अंतरराष्ट्रीय थोक विक्रेता और खुदरा कंपनियां भारत से खरीद बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही हैं। कुछ खरीदारों के कुल आयात में भारतीय निर्माताओं की हिस्सेदारी 40 से 80 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। यह रुझान भारतीय उत्पादकों के लिए नए कारोबारी अवसरों का संकेत देता है।

जर्मनी, अमेरिका और फ्रांस के खरीदारों ने साझा किए अनुभव

मेले में पहुंचे अंतरराष्ट्रीय खरीदारों ने भारतीय उत्पादों और सोर्सिंग सुविधाओं को लेकर अपने अनुभव साझा किए।

जर्मनी से आए पीटर ज़ूर्न पिछले 14 वर्षों से आईएचजीएफ दिल्ली फेयर में नियमित रूप से शामिल हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि यह आयोजन नए संग्रह तलाशने, इंटीरियर डेकोर उत्पादों को देखने और आपूर्तिकर्ताओं के साथ संबंध मजबूत करने का महत्वपूर्ण माध्यम है। उनकी कंपनी के आयात में भारत की हिस्सेदारी लगभग 50 प्रतिशत है।
अमेरिका के कैलिफोर्निया से आए स्कॉट ने मेले के आकार और उत्पादों की विविधता की सराहना की। उनकी विशेष रुचि संगमरमर, पीतल और एल्युमीनियम से बने होम डेकोर उत्पादों में रही। उन्होंने बताया कि उनके आयात में भारतीय उत्पादों की हिस्सेदारी करीब 85 प्रतिशत है।
अमेरिका से आईं डीन ऐशले टी. लिन ने होम डेकोर, वस्त्र, पिलो कवर, बेडशीट और सजावटी उत्पादों में रुचि दिखाई। वहीं, फ्रांस से पहली बार आईं एमिल ने टेबलवेयर, लकड़ी और लोहे से बने उत्पादों तथा फर्नीचर की सोर्सिंग में दिलचस्पी व्यक्त की। उन्होंने बताया कि उनके आयात में भारत की हिस्सेदारी फिलहाल लगभग 15 प्रतिशत है और वह इसे बढ़ाने के लिए नए आपूर्तिकर्ताओं की तलाश कर रही हैं।
इन अनुभवों से पता चलता है कि भारतीय हस्तशिल्प और घरेलू सजावट से जुड़े उत्पाद विभिन्न अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अलग-अलग जरूरतों के अनुरूप अवसर प्रदान कर रहे हैं।

कई देशों के प्रमुख ब्रांडों के सोर्सिंग प्रतिनिधि पहुंचे

ईपीसीएच के कार्यकारी निदेशक श्री राजेश रावत ने बताया कि मेले में अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया, नीदरलैंड्स, स्पेन, जापान, चीन और दक्षिण अफ्रीका सहित कई देशों से खरीदार पहुंचे।
प्रमुख अंतरराष्ट्रीय कंपनियों और खुदरा ब्रांडों के सोर्सिंग प्रतिनिधियों ने भी आयोजन में भाग लिया। इनमें ग्रुप 2 लुट्ज़, ऑस्ट्रिया; ए-जेड जीआईएस इंक, कनाडा; मैसन्स डू मोंडे, फ्रांस; मैसिवमोएबेल24 जीएमबीएच, जर्मनी; निटोरी, जापान; लैंडमार्क ग्रुप, यूएई; फैबलरूम और डिज़ाइन्ड बाय वूल्फ, ब्रिटेन; तथा रॉस स्टोर्स, टीजेएक्स कंपनीज़ और वीसीएनव्हाई होम, अमेरिका शामिल हैं।
श्री रावत के अनुसार, पांच दिनों में प्राप्त लगभग 3,600 करोड़ रुपये की व्यावसायिक पूछताछ आयोजन की कारोबारी गतिविधियों का महत्वपूर्ण संकेत है। हालांकि, व्यावसायिक पूछताछ का आंकड़ा वास्तविक रूप से पूरे हुए ऑर्डर या अंतिम बिक्री के बराबर नहीं होता।

केंद्र और स्थानीय प्रशासन के अधिकारियों ने भी किया दौरा

मेले में कई गणमान्य व्यक्तियों और वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। इनमें भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं पूर्व राज्यसभा सांसद सैयद ज़फ़र इस्लाम, केंद्रीय कपड़ा मंत्रालय की सचिव नीलम शामी राव, मंत्रालय की अतिरिक्त सचिव आरती कंवर, हस्तशिल्प विकास आयुक्त अमृत राज, गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस के अतिरिक्त सीईओ अजीत चव्हाण और ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रवि कुमार एन. जी. शामिल रहे।
इसके अलावा, गुजरात सरकार की पूर्व अतिरिक्त मुख्य सचिव सुनैना तोमर और खान मंत्रालय के संयुक्त सचिव विवेक कुमार बाजपेयी ने भी मेले का दौरा किया।
ईपीसीएच के उपाध्यक्ष श्री सागर मेहता ने बताया कि आगंतुकों ने मेले की व्यवस्था और प्रदर्शनी की सराहना की। उन्होंने प्रदर्शकों को उत्पाद नवाचार, बदलती बाजार प्राथमिकताओं और वैश्विक ग्राहकों की मांग के अनुरूप अपने उत्पाद विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया।

12 श्रेणियों में दिए गए अजय शंकर मेमोरियल अवॉर्ड

मेले के समापन समारोह में सर्वश्रेष्ठ स्टैंड डिजाइन और डिस्प्ले के लिए पुरस्कार प्रदान किए गए। प्रदर्शकों की रचनात्मकता और प्रस्तुति को सम्मानित करने के लिए 12 श्रेणियों में अजय शंकर मेमोरियल अवॉर्ड और पी. एन. सूरी मेमोरियल अवॉर्ड दिए गए।
अजय शंकर मेमोरियल अवॉर्ड में लैंप, लाइटिंग और एक्सेसरीज; होम टेक्सटाइल, फर्निशिंग और फ्लोर कवरिंग; फैशन ज्वेलरी और एक्सेसरीज; कॉर्पोरेट एवं सजावटी गिफ्ट्स; बाथरूम एक्सेसरीज; कैंडल, अगरबत्ती, पॉटपुरी और सुगंधित उत्पाद; हैंडमेड पेपर, गिफ्ट रैप, रिबन और सॉफ्ट टॉयज; तथा टिकाऊ उत्पादों जैसी श्रेणियों को शामिल किया गया।
वहीं, पी. एन. सूरी मेमोरियल अवॉर्ड हाउसवेयर, टेबल एवं सजावटी उत्पादों तथा फर्नीचर, फर्नीचर हार्डवेयर और होम एक्सेसरीज की श्रेणियों में दिए गए। इन पुरस्कारों का उद्देश्य प्रदर्शकों के उत्कृष्ट स्टैंड डिजाइन, रचनात्मक प्रदर्शन और उत्पाद प्रस्तुति को प्रोत्साहित करना है।

भारतीय हस्तशिल्प निर्यात का आंकड़ा 33,168 करोड़ रुपये

ईपीसीएच देश से विभिन्न अंतरराष्ट्रीय बाजारों में हस्तशिल्प निर्यात को बढ़ावा देने और भारत को उच्च गुणवत्ता वाले हस्तनिर्मित उत्पादों के विश्वसनीय आपूर्तिकर्ता के रूप में स्थापित करने की दिशा में काम करता है।
ईपीसीएच के कार्यकारी निदेशक श्री राजेश रावत के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान भारत से हस्तशिल्प का कुल निर्यात 33,168 करोड़ रुपये यानी 3,754 मिलियन अमेरिकी डॉलर रहा।
आईएचजीएफ दिल्ली फेयर–ऑटम 2026 के समापन के साथ भारतीय निर्यातकों को अंतरराष्ट्रीय खरीदारों से जुड़ने, नए बाजारों की मांग समझने और दीर्घकालिक कारोबारी संबंध विकसित करने का एक और अवसर मिला। अब उद्योग जगत की नजर मार्च 2027 में होने वाले अगले संस्करण पर रहेगी, जहां नए उत्पादों, डिजाइन और सोर्सिंग अवसरों के साथ कारोबार को आगे बढ़ाने की उम्मीद है।

 

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