पराली जलाने पर रोक के लिए केंद्र सरकार की टीम ने किया स्थलीय निरीक्षण
कस्टम हायरिंग सेंटर और FARM S ऐप से किसानों को मिल रहे आधुनिक कृषि यंत्र
गौतमबुद्धनगर। धान की कटाई के मौसम में पराली जलाने की घटनाओं पर रोक लगाने और वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार की टीम ने गौतमबुद्धनगर में फसल अवशेष प्रबंधन व्यवस्थाओं का स्थलीय निरीक्षण किया। इस दौरान टीम ने जेवर, दादरी और बिसरख विकासखंड के 20 से अधिक गांवों का दौरा किया। अधिकारियों ने किसानों के खेतों और कस्टम हायरिंग सेंटरों पर पहुंचकर आधुनिक कृषि यंत्रों की उपलब्धता और उनके इस्तेमाल की जानकारी ली। साथ ही फसल अवशेषों के वैज्ञानिक प्रबंधन की जमीनी स्थिति का भी जायजा लिया।
मुख्य बिंदु
- केंद्र सरकार की टीम ने गौतमबुद्धनगर के 20 से अधिक गांवों का निरीक्षण किया।
- जेवर, दादरी और बिसरख विकासखंड में कृषि व्यवस्थाओं की समीक्षा की गई।
- जनपद में 4 कस्टम हायरिंग सेंटर और 20 से अधिक एकल कृषि यंत्र संचालित हैं।
- किसानों को सुपर सीडर, हैप्पी सीडर, मल्चर और अन्य आधुनिक मशीनें उपलब्ध कराई जा रही हैं।
- FARM S ऐप से किसान किराये पर कृषि मशीनरी बुक कर सकते हैं।
- पराली जलाने के बजाय पशुचारे और बायोगैस उत्पादन में इस्तेमाल करने की जानकारी दी गई।
20 से अधिक गांवों में पहुंची केंद्रीय टीम
केंद्र सरकार के निर्देशों के क्रम में 30 अक्टूबर 2026 को यह निरीक्षण किया गया। इसका उद्देश्य धान की कटाई के दौरान फसल अवशेष जलाने की घटनाओं को रोकना और पर्यावरण संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयासों की समीक्षा करना था।
टीम ने जेवर, दादरी और बिसरख विकासखंड के अंतर्गत घरबरा, पारसोल, दादरी, नूरपुर और फूलपुर सहित 20 से अधिक गांवों का भ्रमण किया। इस दौरान विभिन्न कस्टम हायरिंग सेंटरों और किसानों के खेतों का निरीक्षण किया गया।
निरीक्षण टीम में भोपाल स्थित केंद्रीय कृषि मशीनरी प्रशिक्षण एवं परीक्षण संस्थान (CFMTTI) के निदेशक डॉ. नांदेडे शामिल रहे। उनके साथ उप कृषि निदेशक गौतमबुद्धनगर विवेक दुबे और वरिष्ठ सहायक साजिद गहलौत भी मौजूद रहे।
जनपद में 4 कस्टम हायरिंग सेंटर संचालित
निरीक्षण के दौरान उप कृषि निदेशक विवेक दुबे ने टीम को जनपद में संचालित कृषि योजनाओं और उपलब्ध मशीनरी की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जिले में 4 कस्टम हायरिंग सेंटर और 20 से अधिक एकल कृषि यंत्र संचालित हैं।
इन केंद्रों के माध्यम से किसानों को आधुनिक कृषि मशीनें किराये पर उपलब्ध कराई जा रही हैं। इनमें रोटावेटर, मल्चर, एमबी प्लाऊ, जीरो सीड ड्रिल, सुपर सीडर, हैप्पी सीडर, श्रेडर, स्ट्रॉ मास्टर, रीपर कंबाइनर, क्रॉप रीपर, लेजर लैंड लेवलर और डिस्क हैरो जैसे यंत्र शामिल हैं।
इन मशीनों की मदद से किसान धान की कटाई के बाद खेतों में बचे अवशेषों का उचित प्रबंधन कर सकते हैं। इससे पराली जलाने की जरूरत कम होती है। साथ ही अगली फसल की बुवाई के लिए खेत तैयार करने में भी मदद मिलती है।
इन-सीटू और एक्स-सीटू तकनीक से होगा पराली प्रबंधन
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने फसल अवशेष प्रबंधन की दो प्रमुख तकनीकों की जानकारी दी। इनमें इन-सीटू और एक्स-सीटू प्रबंधन शामिल हैं।
इन-सीटू तकनीक के तहत फसल अवशेषों को खेत में ही मशीनों की सहायता से मिट्टी में मिलाया जाता है। इससे मिट्टी में जैविक पदार्थ बढ़ाने और उसकी उर्वरा शक्ति बनाए रखने में मदद मिलती है।
वहीं, एक्स-सीटू तकनीक में खेत से पराली को बाहर निकालकर उसका दूसरे उपयोगों में इस्तेमाल किया जाता है। इसके लिए बेलर मशीन से पराली की गांठें बनाई जाती हैं। इन गांठों को नजदीकी कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) संयंत्रों और ब्रिकेट निर्माण इकाइयों तक पहुंचाया जाता है।
इस तरह पराली को बेकार समझकर जलाने के बजाय उपयोगी संसाधन के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।
पशुचारे और बायोगैस उत्पादन में भी हो रहा पराली का उपयोग
अधिकारियों ने बताया कि जनपद के किसान धान की पराली का उपयोग पशुचारे के रूप में भी कर रहे हैं। इसके अलावा बेलर मशीन की सहायता से पराली एकत्र करके उसे बायोगैस और ब्रिकेट बनाने वाली इकाइयों तक पहुंचाया जा रहा है।
इससे किसानों को फसल अवशेषों के निस्तारण का वैकल्पिक तरीका मिल रहा है। वहीं, खेतों में पराली जलाने से होने वाले धुएं और प्रदूषण को कम करने में भी सहायता मिल सकती है।
जनपदीय अधिकारियों के अनुसार, पिछले वर्ष भी गौतमबुद्धनगर में पराली जलाने की घटनाएं संज्ञान में नहीं आई थीं। विभाग इस व्यवस्था को आगे भी प्रभावी बनाए रखने के लिए प्रयास कर रहा है।
FARM S ऐप से किराये पर मिलेंगे कृषि यंत्र
निरीक्षण के दौरान CFMTTI के निदेशक ने किसानों से सीधे संवाद किया। उन्होंने कृषि यंत्रों के नियमित संचालन और उनके उपयोग का रिकॉर्ड रखने के लिए लॉगबुक तथा मूवमेंट रजिस्टर संचालित करने की जानकारी दी।
इसके साथ ही उन्होंने कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा विकसित FARM S (Farm Machinery Solutions) ऐप के बारे में भी बताया।
इस ऐप की मदद से किसान अपने आसपास उपलब्ध कृषि मशीनों और उपकरणों की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। जरूरत के अनुसार वे इन मशीनों को किराये पर बुक भी कर सकते हैं।
यह सुविधा विशेष रूप से छोटे और सीमांत किसानों के लिए उपयोगी है। ऐसे किसान महंगे कृषि यंत्र खरीदने के बजाय जरूरत के समय उन्हें किराये पर लेकर खेती का काम कर सकते हैं।
उचित किराये पर मशीनें उपलब्ध कराने के निर्देश
CFMTTI के निदेशक ने कस्टम हायरिंग सेंटर संचालकों को निर्देश दिए कि वे किसानों को उचित और वाजिब किराये पर कृषि यंत्र उपलब्ध कराएं। इसका उद्देश्य अधिक से अधिक किसानों तक आधुनिक कृषि तकनीक की पहुंच सुनिश्चित करना है।
उन्होंने किसानों से भी अपील की कि वे फसल अवशेषों को खेतों में न जलाएं। इसके बजाय उपलब्ध कृषि मशीनों और वैज्ञानिक तकनीकों का इस्तेमाल करें।
उन्होंने बताया कि पराली का वैज्ञानिक प्रबंधन केवल प्रदूषण रोकने तक सीमित नहीं है। इससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति बनाए रखने और टिकाऊ कृषि व्यवस्था को बढ़ावा देने में भी मदद मिलती है।
पर्यावरण संरक्षण के लिए किसानों से सहयोग की अपील
उप कृषि निदेशक विवेक दुबे ने बताया कि जनपद में उपलब्ध 4 कस्टम हायरिंग सेंटर और 20 से अधिक एकल कृषि यंत्रों के माध्यम से किसानों को आधुनिक तकनीकों से जोड़ा जा रहा है।
इसके अलावा डिजिटल सुविधाओं के जरिए भी कृषि मशीनरी की उपलब्धता आसान बनाने का प्रयास किया जा रहा है। विभाग का उद्देश्य किसानों को पराली प्रबंधन के बेहतर विकल्प उपलब्ध कराना है।
अधिकारियों ने किसानों से अपील की कि वे फसल अवशेषों को आग न लगाएं। उपलब्ध कृषि यंत्रों और वैज्ञानिक तरीकों से उनका उचित प्रबंधन करें। इससे वायु प्रदूषण को रोकने के साथ मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने में भी मदद मिलेगी।
सौजन्य: सूचना विभाग, गौतमबुद्धनगर।


