
Waqf Bill: लोकसभा में वक्फ संशोधन बिल पर बहस के दौरान AIMIM प्रमुख और हैदराबाद सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने विरोध का अनोखा तरीका अपनाया। ओवैसी ने गांधी जी का उदाहरण देते हुए बिल का विरोध किया और उसे फाड़ दिया। उनका कहना था कि महात्मा गांधी ने जब दक्षिण अफ्रीका में काले लोगों के खिलाफ बने कानूनों के बारे में कहा था कि “मेरी अंतरात्मा इसे स्वीकार नहीं करती”, उसी तरह वे भी इस बिल को असंवैधानिक मानते हैं और इसे फाड़ रहे हैं।
ओवैसी का आरोप: BJP देश में धार्मिक बंटवारा कर रही है
ओवैसी ने BJP पर आरोप लगाते हुए कहा कि यह पार्टी मंदिर और मस्जिद के नाम पर देश में विभाजन की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा, “मैं इस बिल को असंवैधानिक मानता हूं और मैं इसे फाड़ रहा हूं।” ओवैसी ने सांसदों से अपील की कि वे इस बिल के खिलाफ उनके द्वारा किए गए 10 संशोधनों को स्वीकार करें। उनका कहना था कि यह बिल सिर्फ मुस्लिम समुदाय के खिलाफ है और इसका उद्देश्य धार्मिक द्वेष को बढ़ावा देना है।

#WATCH | Delhi | AIMIM Chief Asasuddin Owaisi tears the copy of #WaqfAmendmentBill during his remarks in the ongoing debate in the Lok Sabha pic.twitter.com/9P4ZfZUDKE
— ANI (@ANI) April 2, 2025

BJP सांसद का सवाल: ओवैसी ने क्यों फाड़ा बिल?
BJP सांसद जगदंबिका पाल ने ओवैसी के इस कदम पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा, “ओवैसी ने इसे असंवैधानिक बताया, लेकिन उनका यह कदम असंवैधानिक है। वे क्यों इस बिल को फाड़ रहे हैं?” पाल ने ओवैसी से स्पष्ट रूप से जवाब मांगा और कहा कि इस तरह के प्रतीकात्मक विरोध से लोकतंत्र की भावना का उल्लंघन होता है। उनके सवाल का जवाब ओवैसी ने नहीं दिया, लेकिन उनका विरोध बिल पर ही केंद्रित रहा।
विपक्षी दलों का विरोध: कांग्रेस, तृणमूल और शिवसेना ने जताई चिंता
विपक्षी दलों ने भी Waqf Amendment Bill के कई प्रावधानों का विरोध किया। तृणमूल कांग्रेस, डीएमके और शिवसेना UBT ने इस बिल को राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित बताया। कांग्रेस नेता गौरव गोगोई ने कहा कि सरकार मुस्लिमों को धार्मिक प्रमाण पत्र देगी, तो क्या अन्य धर्मों से भी ऐसा प्रमाण पत्र लिया जाएगा? उन्होंने मंत्री रिजिजू द्वारा की गई व्यापक चर्चा की बातों को झूठा करार दिया और कहा कि विपक्षी सांसदों की सलाह को नजरअंदाज किया गया। गोगोई ने बीजेपी पर आरोप लगाया कि वह मुस्लिम महिलाओं और बच्चों के प्रति संवेदनशील होने का ढोंग कर रही है, जबकि उसका असली उद्देश्य सांप्रदायिक सौहार्द को नष्ट करना है।
वहीं कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने इस बिल को असंवैधानिक बताया। उनका कहना था कि सरकार को वक्फ संपत्तियों का पंजीकरण छह महीने के भीतर क्यों करना चाहिए, जब यह काम पिछले 10 सालों में नहीं हो सका। इस तरह के विरोध के बावजूद, सरकार ने बिल पर जोर दिया, और यह सवाल उठता है कि क्या यह विवाद असल में धार्मिक राजनीतिक हितों का प्रतीक है?

