Thursday, October 1, 2026
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समोसा, वड़ा पाव और पकौड़े बेचने वालों के लिए जरूरी खबर: खाने की चीजें अखबार में परोसना या पैक करना नियमों के खिलाफ

FSSAI की एडवाइजरी फिर चर्चा में, खाद्य सुरक्षा को लेकर बढ़ी जागरूकता
देशभर में खाद्य विक्रेताओं को सुरक्षित पैकेजिंग अपनाने की सलाह, स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने भी जताई चिंता

ग्रेटर नोएडा/नई दिल्ली। देशभर में समोसा, वड़ा पाव, पकौड़े और अन्य खाद्य पदार्थ बेचने वाले दुकानदारों के लिए एक महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) द्वारा जारी खाद्य सुरक्षा दिशा-निर्देशों के अनुसार खाने-पीने की वस्तुओं को अखबार में लपेटना, पैक करना या परोसना सुरक्षित नहीं माना जाता है।

हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर इस विषय को लेकर कई दावे वायरल हो रहे हैं, जिसके बाद यह मुद्दा फिर चर्चा में आ गया है। FSSAI ने अपनी एडवाइजरी में स्पष्ट किया है कि अखबार की स्याही और पुनर्चक्रित कागज (Recycled Paper) में मौजूद कुछ रसायन खाद्य पदार्थों के संपर्क में आने पर स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकते हैं।

अखबार में खाना परोसना क्यों माना जाता है असुरक्षित?

विशेषज्ञों के अनुसार अखबार में उपयोग होने वाली प्रिंटिंग इंक में विभिन्न प्रकार के रसायन, रंग, पिगमेंट और अन्य तत्व मौजूद हो सकते हैं। गर्म समोसे, पकौड़े, कचौड़ी या अन्य खाद्य पदार्थ सीधे अखबार के संपर्क में आते हैं तो ये तत्व भोजन में पहुंच सकते हैं।

FSSAI ने अपनी एडवाइजरी में कहा है कि पुराने समाचार पत्रों और रिसाइकिल पेपर में धात्विक तत्व, मिनरल ऑयल और अन्य रासायनिक पदार्थ भी मौजूद हो सकते हैं, जो लंबे समय तक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते हैं।

दुकानदारों और खाद्य व्यवसायियों को क्या करना चाहिए?

अखबार में पैक किए गए समोसे और पकौड़े पर FSSAI की खाद्य सुरक्षा चेतावनी
अखबार में पैक किए गए समोसे और पकौड़े पर FSSAI की खाद्य सुरक्षा चेतावनी

खाद्य सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि दुकानदारों को अखबार की जगह फूड-ग्रेड पेपर, बटर पेपर, स्वीकृत पैकेजिंग सामग्री या अन्य सुरक्षित विकल्पों का उपयोग करना चाहिए। इससे ग्राहकों के स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित होगी और खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन भी हो सकेगा।

छोटे होटल, ठेले, रेहड़ी संचालक और फास्ट फूड विक्रेताओं को विशेष रूप से सुरक्षित पैकेजिंग अपनाने की सलाह दी गई है।

नियमों के उल्लंघन पर क्या हो सकती है कार्रवाई?

खाद्य सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार यदि कोई खाद्य व्यवसायी खाद्य सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करता पाया जाता है तो उसके खिलाफ खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत कार्रवाई की जा सकती है। कार्रवाई का स्वरूप मामले की गंभीरता, जांच रिपोर्ट और संबंधित प्रावधानों पर निर्भर करता है।

हालांकि सोशल मीडिया पर वायरल कुछ दावों में सीधे जेल की सजा का उल्लेख किया जा रहा है, लेकिन वास्तविक कार्रवाई संबंधित कानूनों और जांच के निष्कर्षों के आधार पर तय की जाती है।

जागरूकता बढ़ाने पर जोर

FSSAI ने राज्यों के खाद्य सुरक्षा अधिकारियों से भी इस विषय पर जागरूकता अभियान चलाने का आग्रह किया है, ताकि दुकानदारों और आम लोगों को अखबार में खाद्य पदार्थ पैक करने के संभावित स्वास्थ्य जोखिमों के बारे में जानकारी मिल सके।

विशेषज्ञों का मानना है कि सुरक्षित खाद्य पैकेजिंग केवल नियमों का पालन भर नहीं है, बल्कि उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य की रक्षा का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में खाद्य विक्रेताओं और उपभोक्ताओं दोनों को इस विषय पर सजग रहने की आवश्यकता है।

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समोसा, वड़ा पाव और पकौड़े बेचने वालों के लिए जरूरी खबर: खाने की चीजें अखबार में परोसना या पैक करना नियमों के खिलाफ

FSSAI की एडवाइजरी फिर चर्चा में, खाद्य सुरक्षा को लेकर बढ़ी जागरूकता
देशभर में खाद्य विक्रेताओं को सुरक्षित पैकेजिंग अपनाने की सलाह, स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने भी जताई चिंता

ग्रेटर नोएडा/नई दिल्ली। देशभर में समोसा, वड़ा पाव, पकौड़े और अन्य खाद्य पदार्थ बेचने वाले दुकानदारों के लिए एक महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) द्वारा जारी खाद्य सुरक्षा दिशा-निर्देशों के अनुसार खाने-पीने की वस्तुओं को अखबार में लपेटना, पैक करना या परोसना सुरक्षित नहीं माना जाता है।

हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर इस विषय को लेकर कई दावे वायरल हो रहे हैं, जिसके बाद यह मुद्दा फिर चर्चा में आ गया है। FSSAI ने अपनी एडवाइजरी में स्पष्ट किया है कि अखबार की स्याही और पुनर्चक्रित कागज (Recycled Paper) में मौजूद कुछ रसायन खाद्य पदार्थों के संपर्क में आने पर स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकते हैं।

अखबार में खाना परोसना क्यों माना जाता है असुरक्षित?

विशेषज्ञों के अनुसार अखबार में उपयोग होने वाली प्रिंटिंग इंक में विभिन्न प्रकार के रसायन, रंग, पिगमेंट और अन्य तत्व मौजूद हो सकते हैं। गर्म समोसे, पकौड़े, कचौड़ी या अन्य खाद्य पदार्थ सीधे अखबार के संपर्क में आते हैं तो ये तत्व भोजन में पहुंच सकते हैं।

FSSAI ने अपनी एडवाइजरी में कहा है कि पुराने समाचार पत्रों और रिसाइकिल पेपर में धात्विक तत्व, मिनरल ऑयल और अन्य रासायनिक पदार्थ भी मौजूद हो सकते हैं, जो लंबे समय तक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते हैं।

दुकानदारों और खाद्य व्यवसायियों को क्या करना चाहिए?

अखबार में पैक किए गए समोसे और पकौड़े पर FSSAI की खाद्य सुरक्षा चेतावनी
अखबार में पैक किए गए समोसे और पकौड़े पर FSSAI की खाद्य सुरक्षा चेतावनी

खाद्य सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि दुकानदारों को अखबार की जगह फूड-ग्रेड पेपर, बटर पेपर, स्वीकृत पैकेजिंग सामग्री या अन्य सुरक्षित विकल्पों का उपयोग करना चाहिए। इससे ग्राहकों के स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित होगी और खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन भी हो सकेगा।

छोटे होटल, ठेले, रेहड़ी संचालक और फास्ट फूड विक्रेताओं को विशेष रूप से सुरक्षित पैकेजिंग अपनाने की सलाह दी गई है।

नियमों के उल्लंघन पर क्या हो सकती है कार्रवाई?

खाद्य सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार यदि कोई खाद्य व्यवसायी खाद्य सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करता पाया जाता है तो उसके खिलाफ खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत कार्रवाई की जा सकती है। कार्रवाई का स्वरूप मामले की गंभीरता, जांच रिपोर्ट और संबंधित प्रावधानों पर निर्भर करता है।

हालांकि सोशल मीडिया पर वायरल कुछ दावों में सीधे जेल की सजा का उल्लेख किया जा रहा है, लेकिन वास्तविक कार्रवाई संबंधित कानूनों और जांच के निष्कर्षों के आधार पर तय की जाती है।

जागरूकता बढ़ाने पर जोर

FSSAI ने राज्यों के खाद्य सुरक्षा अधिकारियों से भी इस विषय पर जागरूकता अभियान चलाने का आग्रह किया है, ताकि दुकानदारों और आम लोगों को अखबार में खाद्य पदार्थ पैक करने के संभावित स्वास्थ्य जोखिमों के बारे में जानकारी मिल सके।

विशेषज्ञों का मानना है कि सुरक्षित खाद्य पैकेजिंग केवल नियमों का पालन भर नहीं है, बल्कि उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य की रक्षा का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में खाद्य विक्रेताओं और उपभोक्ताओं दोनों को इस विषय पर सजग रहने की आवश्यकता है।

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