Monday, October 19, 2026
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ग्रेटर नोएडा पाई 1 में शबरी मिलन से बाली वध तक की लीला ने मोहा मन, जय श्रीराम के जयकारों से गूंजा रामलीला परिसर

शबरी की भक्ति, हनुमान-राम मिलन और बाली वध का हुआ भव्य मंचन, दर्शक हुए भावविभोर

19 अक्टूबर को लंका दहन और सेतु निर्माण की लीला, 20 अक्टूबर तक चलेगा भव्य रामलीला एवं दशहरा महोत्सव

ग्रेटर नोएडा में रामलीला मंचन ने दर्शकों को किया मंत्रमुग्ध

ग्रेटर नोएडा। श्री धार्मिक रामलीला कमेटी द्वारा आयोजित भव्य रामलीला एवं दशहरा महोत्सव 2026 में 18 अक्टूबर को भगवान श्रीराम के वन में माता सीता की खोज, माता शबरी से मिलन, हनुमान जी से भेंट, सुग्रीव से मित्रता और बाली वध की लीलाओं का भावपूर्ण मंचन किया गया। इन प्रसंगों ने श्रद्धालुओं को भक्ति, प्रेम, मित्रता और धर्म के मार्ग पर चलने का संदेश दिया। प्रभु श्रीराम और माता सीता के जयकारों से पूरा रामलीला परिसर गूंज उठा। मंचन के दौरान उपस्थित दर्शक भावविभोर नजर आए और कलाकारों के अभिनय की सराहना की।

परम श्रद्धेय गोस्वामी सुशील जी महाराज के दिशा-निर्देशन तथा संस्था के युवा अध्यक्ष श्री आनंद भाटी के मार्गदर्शन में रामलीला का भव्य आयोजन किया जा रहा है। रामलीला का मंचन 11 अक्टूबर से 20 अक्टूबर 2026 तक प्रतिदिन शाम 7 बजे किया जा रहा है।

शबरी मिलन ने दिया सच्ची भक्ति और समर्पण का संदेश

संस्था के अध्यक्ष श्री आनंद भाटी ने बताया कि रामलीला के आठवें दिन भगवान श्रीराम और भाई लक्ष्मण माता सीता के हरण के बाद उनकी खोज में वन-वन भटकते हैं। इसी क्रम में दोनों भाई माता शबरी के आश्रम पहुंचते हैं। माता शबरी का प्रसंग प्रेम, विश्वास और निस्वार्थ भक्ति की अद्भुत मिसाल है।

माता शबरी की भक्ति यह संदेश देती है कि ईश्वर के प्रति सच्चा प्रेम और समर्पण सबसे महत्वपूर्ण है। उनके चरित्र के माध्यम से दर्शकों को बताया गया कि भगवान भाव के भूखे हैं। सच्चे मन से की गई भक्ति में किसी प्रकार का भेदभाव या दिखावा नहीं होता।

माता शबरी भगवान श्रीराम को किष्किंधा पर्वत की ओर जाने और वहां सुग्रीव से सहायता लेने का सुझाव देती हैं। इसके बाद प्रभु श्रीराम और लक्ष्मण माता सीता की खोज को आगे बढ़ाते हुए किष्किंधा की ओर प्रस्थान करते हैं।

हनुमान-राम मिलन ने मोहा दर्शकों का मन

किष्किंधा के निकट पहुंचने पर बजरंगबली हनुमान जी ब्राह्मण का वेश धारण कर भगवान श्रीराम और लक्ष्मण के पास पहुंचते हैं। वे दोनों भाइयों के परिचय और उनके उद्देश्य को जानने का प्रयास करते हैं। इसके बाद हनुमान जी और प्रभु श्रीराम का मिलन होता है। रामभक्त हनुमान के इस प्रसंग ने दर्शकों को भावुक कर दिया।

हनुमान जी भगवान श्रीराम और लक्ष्मण को सुग्रीव के पास लेकर जाते हैं। सुग्रीव अपने बड़े भाई बाली से परेशान होते हैं। भगवान श्रीराम सुग्रीव की सहायता करने का वचन देते हैं। इसके बाद बाली और सुग्रीव के संघर्ष तथा बाली वध की लीला का मंचन किया जाता है।

बाली वध के बाद सुग्रीव को किष्किंधा का राज्य प्राप्त होता है। इसके साथ ही सुग्रीव और वानर सेना की मदद से माता सीता की खोज का अभियान शुरू होता है। वानर सेना अलग-अलग दिशाओं में माता सीता की तलाश के लिए निकलती है। यह प्रसंग मित्रता निभाने, अन्याय के विरुद्ध खड़े होने और संकट के समय सहयोग करने का संदेश देता है।

जामवंत ने हनुमान जी को कराया उनकी शक्ति का एहसास

माता सीता की खोज में हनुमान जी के नेतृत्व वाली टोली दक्षिण दिशा में आगे बढ़ती है। समुद्र के किनारे पहुंचने पर सभी इस बात को लेकर चिंतित होते हैं कि विशाल समुद्र पार करके लंका तक कैसे पहुंचा जाए।

ऐसे समय में जामवंत जी हनुमान जी को उनकी असाधारण शक्तियों का स्मरण कराते हैं। वे उन्हें प्रेरित करते हैं कि संसार में कोई भी कार्य उनके लिए असंभव नहीं है। जामवंत जी की प्रेरणा से हनुमान जी अपनी शक्ति को पहचानते हैं और लंका जाने के लिए समुद्र पार करने का निर्णय लेते हैं।

रामलीला में यह प्रसंग आत्मविश्वास, प्रेरणा और अपनी क्षमताओं को पहचानने का महत्वपूर्ण संदेश देता है। कई बार व्यक्ति अपनी शक्तियों को भूल जाता है। ऐसे में सही मार्गदर्शन उसे कठिन से कठिन लक्ष्य प्राप्त करने का साहस देता है।

लंका में विभीषण से भेंट और अशोक वाटिका में माता सीता के दर्शन

समुद्र पार करते समय हनुमान जी को सुरसा की परीक्षा का सामना करना पड़ता है। अपनी बुद्धि और सूझबूझ से वे इस चुनौती को पार करते हैं। लंका पहुंचने पर उनका सामना लंकिनी से होता है। इसके बाद वे लंका में प्रवेश कर माता सीता की खोज शुरू करते हैं।

खोज के दौरान हनुमान जी को एक ऐसी कुटिया दिखाई देती है, जिस पर भगवान श्रीराम का नाम अंकित होता है। यह कुटिया विभीषण की होती है। विभीषण से भेंट होने पर हनुमान जी को पता चलता है कि माता सीता अशोक वाटिका में निवास कर रही हैं।

इसके बाद हनुमान जी अशोक वाटिका पहुंचते हैं और माता सीता को भगवान श्रीराम की मुद्रिका देते हैं। मुद्रिका देखकर माता सीता उसे पहचान जाती हैं। हनुमान जी अपना परिचय देते हैं और प्रभु श्रीराम का संदेश माता सीता तक पहुंचाते हैं। यह प्रसंग विश्वास, आशा और संकट के समय धैर्य बनाए रखने की प्रेरणा देता है।

हनुमान जी और माता सीता की भेंट रामायण के सबसे भावनात्मक प्रसंगों में से एक है। इस दृश्य में माता सीता को भगवान श्रीराम के संदेश के माध्यम से आशा मिलती है कि उन्हें रावण की कैद से मुक्त कराने के लिए प्रयास जारी हैं।

जय श्रीराम के जयकारों से गूंजा रामलीला परिसर

शबरी मिलन से लेकर अशोक वाटिका में माता सीता के दर्शन तक की लीलाओं का कलाकारों ने प्रभावशाली मंचन किया। दर्शकों ने पूरे उत्साह के साथ रामलीला का आनंद लिया। प्रभु श्रीराम और माता सीता के जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो गया।

आयोजकों के अनुसार, रामलीला का उद्देश्य केवल धार्मिक प्रसंगों का मंचन करना नहीं है, बल्कि नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, मर्यादा, सेवा, त्याग और नैतिक मूल्यों से जोड़ना भी है। ऐसे आयोजन परिवारों और समाज को एक साथ लाने के साथ ही धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

19 और 20 अक्टूबर को होंगी प्रमुख लीलाएं

श्री धार्मिक रामलीला कमेटी की ओर से जारी कार्यक्रम के अनुसार, 19 अक्टूबर को लंका दहन, सेतु निर्माण और रावण-अंगद संवाद जैसी प्रमुख लीलाओं का मंचन किया जाएगा। इसके बाद 20 अक्टूबर को लक्ष्मण-मेघनाद प्रसंग तथा राम-कुंभकर्ण और राम-रावण युद्ध की लीलाएं आकर्षण का केंद्र रहेंगी।

इन प्रसंगों के माध्यम से भगवान श्रीराम की धर्म के प्रति निष्ठा, हनुमान जी की वीरता और अधर्म पर धर्म की विजय का संदेश दिया जाएगा। दशहरा महोत्सव के अंतिम दिनों में दर्शकों को रामायण के कई महत्वपूर्ण और रोमांचक दृश्य देखने को मिलेंगे।

आयोजकों का कहना है कि इस बार का भव्य रामलीला एवं दशहरा महोत्सव क्षेत्रवासियों के लिए यादगार आयोजन बनने जा रहा है। इसका उद्देश्य धार्मिक आस्था के साथ-साथ सांस्कृतिक विरासत और संस्कारों को अगली पीढ़ी तक पहुंचाना है।

अतिथियों और आयोजन समिति की रही महत्वपूर्ण भूमिका

महोत्सव के लिए घोषित प्रमुख अतिथियों में जयप्रकाश (जे.पी.), राष्ट्रीय मंत्री, भारतीय जनता पार्टी; राज्यसभा सांसद एवं भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय सचिव श्री सुरेन्द्र सिंह नागर; भाजपा पश्चिमी उत्तर प्रदेश के क्षेत्रीय अध्यक्ष श्री नवाब सिंह नागर; तथा इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति राजवीर सिंह और न्यायमूर्ति डॉ. गौतम चौधरी शामिल हैं।

आयोजन से जुड़े प्रमुख पदाधिकारियों एवं सदस्यों में संस्था के संस्थापक गोस्वामी सुशील जी महाराज, संस्थापक श्री राजकुमार नागर, श्री प्रदीप शर्मा, श्री शेर सिंह भाटी, मुख्य संरक्षक श्री नरेश गुप्ता, संरक्षक श्री सुशील नागर, श्री धीरेंद्र भाटी, श्री धीरज शर्मा, श्री बालकिशन सफीपुर, श्री दिनेश गुप्ता, श्री पवन नागर, श्री मनोज गुप्ता, श्री सतीश भाटी, अध्यक्ष श्री आनंद भाटी, महासचिव श्रीमती ममता तिवारी, कोषाध्यक्ष श्री अजय नागर, वरिष्ठ उपाध्यक्ष श्री महेश शर्मा बदौली, श्री उमेश गौतम, श्री सत्यवीर मुखिया, श्रीमती रोशनी सिंह, श्री महेश कमांडो, श्री चैन पाल प्रधान, श्री जितेंद्र भाटी, श्री सुभाष भाटी, श्री मनीष डाबर, मीडिया प्रभारी श्री अतुल आनंद, उपाध्यक्ष श्री फिरे प्रधान, श्री पी.पी. शर्मा, श्री श्याम सुंदर फौजी, श्री यशपाल नागर, सचिव श्रीमती ज्योति सिंह, श्रीमती गीता शागर, श्री राकेश भाटी, श्री भगवत भाटी, श्री तेज कुमार भाटी, श्री सुंदर भाटी, श्री पवन भाटी, श्री वीरपाल मावी और श्री जय शर्मा शामिल हैं।

रामलीला कमेटी के पदाधिकारियों और सदस्यों के सहयोग से आयोजित यह महोत्सव धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक परंपरा और सामाजिक सहभागिता का महत्वपूर्ण उदाहरण बन रहा है। आने वाले दिनों में लंका दहन और रावण वध जैसे प्रसंगों को देखने के लिए श्रद्धालुओं में उत्साह बना हुआ है।

 

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ग्रेटर नोएडा पाई 1 में शबरी मिलन से बाली वध तक की लीला ने मोहा मन, जय श्रीराम के जयकारों से गूंजा रामलीला परिसर

शबरी की भक्ति, हनुमान-राम मिलन और बाली वध का हुआ भव्य मंचन, दर्शक हुए भावविभोर

19 अक्टूबर को लंका दहन और सेतु निर्माण की लीला, 20 अक्टूबर तक चलेगा भव्य रामलीला एवं दशहरा महोत्सव

ग्रेटर नोएडा में रामलीला मंचन ने दर्शकों को किया मंत्रमुग्ध

ग्रेटर नोएडा। श्री धार्मिक रामलीला कमेटी द्वारा आयोजित भव्य रामलीला एवं दशहरा महोत्सव 2026 में 18 अक्टूबर को भगवान श्रीराम के वन में माता सीता की खोज, माता शबरी से मिलन, हनुमान जी से भेंट, सुग्रीव से मित्रता और बाली वध की लीलाओं का भावपूर्ण मंचन किया गया। इन प्रसंगों ने श्रद्धालुओं को भक्ति, प्रेम, मित्रता और धर्म के मार्ग पर चलने का संदेश दिया। प्रभु श्रीराम और माता सीता के जयकारों से पूरा रामलीला परिसर गूंज उठा। मंचन के दौरान उपस्थित दर्शक भावविभोर नजर आए और कलाकारों के अभिनय की सराहना की।

परम श्रद्धेय गोस्वामी सुशील जी महाराज के दिशा-निर्देशन तथा संस्था के युवा अध्यक्ष श्री आनंद भाटी के मार्गदर्शन में रामलीला का भव्य आयोजन किया जा रहा है। रामलीला का मंचन 11 अक्टूबर से 20 अक्टूबर 2026 तक प्रतिदिन शाम 7 बजे किया जा रहा है।

शबरी मिलन ने दिया सच्ची भक्ति और समर्पण का संदेश

संस्था के अध्यक्ष श्री आनंद भाटी ने बताया कि रामलीला के आठवें दिन भगवान श्रीराम और भाई लक्ष्मण माता सीता के हरण के बाद उनकी खोज में वन-वन भटकते हैं। इसी क्रम में दोनों भाई माता शबरी के आश्रम पहुंचते हैं। माता शबरी का प्रसंग प्रेम, विश्वास और निस्वार्थ भक्ति की अद्भुत मिसाल है।

माता शबरी की भक्ति यह संदेश देती है कि ईश्वर के प्रति सच्चा प्रेम और समर्पण सबसे महत्वपूर्ण है। उनके चरित्र के माध्यम से दर्शकों को बताया गया कि भगवान भाव के भूखे हैं। सच्चे मन से की गई भक्ति में किसी प्रकार का भेदभाव या दिखावा नहीं होता।

माता शबरी भगवान श्रीराम को किष्किंधा पर्वत की ओर जाने और वहां सुग्रीव से सहायता लेने का सुझाव देती हैं। इसके बाद प्रभु श्रीराम और लक्ष्मण माता सीता की खोज को आगे बढ़ाते हुए किष्किंधा की ओर प्रस्थान करते हैं।

हनुमान-राम मिलन ने मोहा दर्शकों का मन

किष्किंधा के निकट पहुंचने पर बजरंगबली हनुमान जी ब्राह्मण का वेश धारण कर भगवान श्रीराम और लक्ष्मण के पास पहुंचते हैं। वे दोनों भाइयों के परिचय और उनके उद्देश्य को जानने का प्रयास करते हैं। इसके बाद हनुमान जी और प्रभु श्रीराम का मिलन होता है। रामभक्त हनुमान के इस प्रसंग ने दर्शकों को भावुक कर दिया।

हनुमान जी भगवान श्रीराम और लक्ष्मण को सुग्रीव के पास लेकर जाते हैं। सुग्रीव अपने बड़े भाई बाली से परेशान होते हैं। भगवान श्रीराम सुग्रीव की सहायता करने का वचन देते हैं। इसके बाद बाली और सुग्रीव के संघर्ष तथा बाली वध की लीला का मंचन किया जाता है।

बाली वध के बाद सुग्रीव को किष्किंधा का राज्य प्राप्त होता है। इसके साथ ही सुग्रीव और वानर सेना की मदद से माता सीता की खोज का अभियान शुरू होता है। वानर सेना अलग-अलग दिशाओं में माता सीता की तलाश के लिए निकलती है। यह प्रसंग मित्रता निभाने, अन्याय के विरुद्ध खड़े होने और संकट के समय सहयोग करने का संदेश देता है।

जामवंत ने हनुमान जी को कराया उनकी शक्ति का एहसास

माता सीता की खोज में हनुमान जी के नेतृत्व वाली टोली दक्षिण दिशा में आगे बढ़ती है। समुद्र के किनारे पहुंचने पर सभी इस बात को लेकर चिंतित होते हैं कि विशाल समुद्र पार करके लंका तक कैसे पहुंचा जाए।

ऐसे समय में जामवंत जी हनुमान जी को उनकी असाधारण शक्तियों का स्मरण कराते हैं। वे उन्हें प्रेरित करते हैं कि संसार में कोई भी कार्य उनके लिए असंभव नहीं है। जामवंत जी की प्रेरणा से हनुमान जी अपनी शक्ति को पहचानते हैं और लंका जाने के लिए समुद्र पार करने का निर्णय लेते हैं।

रामलीला में यह प्रसंग आत्मविश्वास, प्रेरणा और अपनी क्षमताओं को पहचानने का महत्वपूर्ण संदेश देता है। कई बार व्यक्ति अपनी शक्तियों को भूल जाता है। ऐसे में सही मार्गदर्शन उसे कठिन से कठिन लक्ष्य प्राप्त करने का साहस देता है।

लंका में विभीषण से भेंट और अशोक वाटिका में माता सीता के दर्शन

समुद्र पार करते समय हनुमान जी को सुरसा की परीक्षा का सामना करना पड़ता है। अपनी बुद्धि और सूझबूझ से वे इस चुनौती को पार करते हैं। लंका पहुंचने पर उनका सामना लंकिनी से होता है। इसके बाद वे लंका में प्रवेश कर माता सीता की खोज शुरू करते हैं।

खोज के दौरान हनुमान जी को एक ऐसी कुटिया दिखाई देती है, जिस पर भगवान श्रीराम का नाम अंकित होता है। यह कुटिया विभीषण की होती है। विभीषण से भेंट होने पर हनुमान जी को पता चलता है कि माता सीता अशोक वाटिका में निवास कर रही हैं।

इसके बाद हनुमान जी अशोक वाटिका पहुंचते हैं और माता सीता को भगवान श्रीराम की मुद्रिका देते हैं। मुद्रिका देखकर माता सीता उसे पहचान जाती हैं। हनुमान जी अपना परिचय देते हैं और प्रभु श्रीराम का संदेश माता सीता तक पहुंचाते हैं। यह प्रसंग विश्वास, आशा और संकट के समय धैर्य बनाए रखने की प्रेरणा देता है।

हनुमान जी और माता सीता की भेंट रामायण के सबसे भावनात्मक प्रसंगों में से एक है। इस दृश्य में माता सीता को भगवान श्रीराम के संदेश के माध्यम से आशा मिलती है कि उन्हें रावण की कैद से मुक्त कराने के लिए प्रयास जारी हैं।

जय श्रीराम के जयकारों से गूंजा रामलीला परिसर

शबरी मिलन से लेकर अशोक वाटिका में माता सीता के दर्शन तक की लीलाओं का कलाकारों ने प्रभावशाली मंचन किया। दर्शकों ने पूरे उत्साह के साथ रामलीला का आनंद लिया। प्रभु श्रीराम और माता सीता के जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो गया।

आयोजकों के अनुसार, रामलीला का उद्देश्य केवल धार्मिक प्रसंगों का मंचन करना नहीं है, बल्कि नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, मर्यादा, सेवा, त्याग और नैतिक मूल्यों से जोड़ना भी है। ऐसे आयोजन परिवारों और समाज को एक साथ लाने के साथ ही धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

19 और 20 अक्टूबर को होंगी प्रमुख लीलाएं

श्री धार्मिक रामलीला कमेटी की ओर से जारी कार्यक्रम के अनुसार, 19 अक्टूबर को लंका दहन, सेतु निर्माण और रावण-अंगद संवाद जैसी प्रमुख लीलाओं का मंचन किया जाएगा। इसके बाद 20 अक्टूबर को लक्ष्मण-मेघनाद प्रसंग तथा राम-कुंभकर्ण और राम-रावण युद्ध की लीलाएं आकर्षण का केंद्र रहेंगी।

इन प्रसंगों के माध्यम से भगवान श्रीराम की धर्म के प्रति निष्ठा, हनुमान जी की वीरता और अधर्म पर धर्म की विजय का संदेश दिया जाएगा। दशहरा महोत्सव के अंतिम दिनों में दर्शकों को रामायण के कई महत्वपूर्ण और रोमांचक दृश्य देखने को मिलेंगे।

आयोजकों का कहना है कि इस बार का भव्य रामलीला एवं दशहरा महोत्सव क्षेत्रवासियों के लिए यादगार आयोजन बनने जा रहा है। इसका उद्देश्य धार्मिक आस्था के साथ-साथ सांस्कृतिक विरासत और संस्कारों को अगली पीढ़ी तक पहुंचाना है।

अतिथियों और आयोजन समिति की रही महत्वपूर्ण भूमिका

महोत्सव के लिए घोषित प्रमुख अतिथियों में जयप्रकाश (जे.पी.), राष्ट्रीय मंत्री, भारतीय जनता पार्टी; राज्यसभा सांसद एवं भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय सचिव श्री सुरेन्द्र सिंह नागर; भाजपा पश्चिमी उत्तर प्रदेश के क्षेत्रीय अध्यक्ष श्री नवाब सिंह नागर; तथा इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति राजवीर सिंह और न्यायमूर्ति डॉ. गौतम चौधरी शामिल हैं।

आयोजन से जुड़े प्रमुख पदाधिकारियों एवं सदस्यों में संस्था के संस्थापक गोस्वामी सुशील जी महाराज, संस्थापक श्री राजकुमार नागर, श्री प्रदीप शर्मा, श्री शेर सिंह भाटी, मुख्य संरक्षक श्री नरेश गुप्ता, संरक्षक श्री सुशील नागर, श्री धीरेंद्र भाटी, श्री धीरज शर्मा, श्री बालकिशन सफीपुर, श्री दिनेश गुप्ता, श्री पवन नागर, श्री मनोज गुप्ता, श्री सतीश भाटी, अध्यक्ष श्री आनंद भाटी, महासचिव श्रीमती ममता तिवारी, कोषाध्यक्ष श्री अजय नागर, वरिष्ठ उपाध्यक्ष श्री महेश शर्मा बदौली, श्री उमेश गौतम, श्री सत्यवीर मुखिया, श्रीमती रोशनी सिंह, श्री महेश कमांडो, श्री चैन पाल प्रधान, श्री जितेंद्र भाटी, श्री सुभाष भाटी, श्री मनीष डाबर, मीडिया प्रभारी श्री अतुल आनंद, उपाध्यक्ष श्री फिरे प्रधान, श्री पी.पी. शर्मा, श्री श्याम सुंदर फौजी, श्री यशपाल नागर, सचिव श्रीमती ज्योति सिंह, श्रीमती गीता शागर, श्री राकेश भाटी, श्री भगवत भाटी, श्री तेज कुमार भाटी, श्री सुंदर भाटी, श्री पवन भाटी, श्री वीरपाल मावी और श्री जय शर्मा शामिल हैं।

रामलीला कमेटी के पदाधिकारियों और सदस्यों के सहयोग से आयोजित यह महोत्सव धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक परंपरा और सामाजिक सहभागिता का महत्वपूर्ण उदाहरण बन रहा है। आने वाले दिनों में लंका दहन और रावण वध जैसे प्रसंगों को देखने के लिए श्रद्धालुओं में उत्साह बना हुआ है।

 

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