Ghaziabad AQI: गाजियाबाद में पिछले 22 दिनों से रेड जोन में रहने वाला प्रदूषण शनिवार को तेज हवा की वजह से कम हुआ और अब जिला ऑरेंज जोन में आ गया है। हालांकि, एक्यूआई (वायु गुणवत्ता सूचकांक) में कमी के बावजूद यहां की हवा अभी भी स्वास्थ्य के लिए खतरनाक बनी हुई है। शनिवार को गाजियाबाद का एक्यूआई 299 दर्ज किया गया जो कि ऑरेंज जोन की सीमा में आता है। यह बदलाव तो राहत देने वाला है लेकिन पर्यावरण और स्वास्थ्य के लिहाज से अभी भी सावधानी बरतनी जरूरी है।
लोनी में प्रदूषण का स्तर अभी भी चिंताजनक
गाजियाबाद के सबसे प्रदूषित क्षेत्र लोनी में तीन दिनों से एक्यूआई 400 से ऊपर था। शनिवार को यह आंकड़ा 363 तक नीचे आया है, लेकिन यह स्तर अभी भी खतरनाक श्रेणी में आता है। लोनी ने गाजियाबाद के चारों प्रमुख स्टेशन में सबसे ज्यादा प्रदूषण दर्ज किया। दो दिन पहले तक यहां का एक्यूआई 436 तक पहुंच गया था जो अत्यंत खराब संकेत था। इसके बाद भी हवा की गुणवत्ता में सुधार हो रहा है, जो आने वाले समय में उम्मीद की किरण है।
इंदिरापुरम और अन्य क्षेत्रों की स्थिति
गाजियाबाद के अन्य इलाकों की हवा की गुणवत्ता भी चिंताजनक बनी हुई है। इंदिरापुरम में एक्यूआई 313 दर्ज किया गया जो लोनी के बाद दूसरे नंबर पर है। संजयनगर और वसुंधरा में भी क्रमशः 254 और 265 एक्यूआई दर्ज हुआ है। ये सभी क्षेत्र ऑरेंज जोन में आते हैं लेकिन स्वास्थ्य के लिहाज से जोखिम से मुक्त नहीं हैं। इसलिए यहां रहने वाले लोगों को भी प्रदूषण से बचाव के उपाय अपनाने की जरूरत है।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की सक्रिय कार्रवाई
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी अंकित सिंह ने बताया कि लोनी क्षेत्र में फैक्ट्रियों पर सख्त कार्रवाई जारी है। कई अवैध फैक्ट्रियों को नोटिस जारी कर बंद कराया जा चुका है। साथ ही, नियमों के उल्लंघन करने वालों पर जुर्माना भी लगाया जा रहा है। ग्रेप (ग्रीन रजिस्ट्री ऑफ पॉल्यूटिंग एंटरप्राइजेज) नियमों के पालन पर लगातार निगरानी रखी जा रही है ताकि प्रदूषण को नियंत्रित किया जा सके। आने वाले दिनों में हवा की गति बढ़ने से प्रदूषण में और कमी आने की संभावना है।
भविष्य की उम्मीद और सावधानियां
गाजियाबाद में प्रदूषण कम होना एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन यह स्थिति अभी भी पूर्ण रूप से सुरक्षित नहीं है। नागरिकों को मास्क पहनने, बाहर अनावश्यक रूप से न निकलने, और प्रदूषण से बचाव के अन्य उपायों का पालन करते रहने की जरूरत है। प्रशासन की कड़ी निगरानी और सक्रियता से ही हवा की गुणवत्ता में सुधार संभव होगा। आने वाले समय में तेज हवा और सख्त नियमों के पालन से गाजियाबाद का प्रदूषण स्तर और भी कम हो सकता है।



