Mumbai AQI: दिल्ली की तरह अब मुंबई भी वायु प्रदूषण की गंभीर समस्या से जूझ रही है। देश की आर्थिक राजधानी मानी जाने वाली मुंबई में हाल के दिनों में हवा की गुणवत्ता बेहद खराब हो गई है। वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) में लगातार बढ़ोतरी हो रही है, जिससे आम लोगों की जिंदगी प्रभावित हो रही है। शहर के कई इलाकों में धुंध और धुआं छाया हुआ है, जिससे सांस लेने में दिक्कत हो रही है और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां बढ़ रही हैं।
मुंबई के विभिन्न इलाकों में वायु गुणवत्ता का हाल
मुंबई के अलग-अलग इलाकों में वायु गुणवत्ता सूचकांक की स्थिति चिंताजनक है। मझगांव में AQI 305 तक पहुंच चुका है जो बेहद खराब स्तर माना जाता है। वहीं चाकला-अंधेरी ईस्ट में 263, नेवी नगर-कोलाबा में 271, मालाड में 223 और ठाणे व नवी मुंबई में भी उच्च स्तर के प्रदूषण दर्ज किए गए हैं। मीरा-भायंदर में भी वायु प्रदूषण का स्तर 192 के करीब है। ये आंकड़े इस बात की ओर इशारा करते हैं कि मुंबई का कई हिस्से जहरीली हवा के घेरे में हैं, जो स्वास्थ्य के लिए अत्यंत खतरनाक हो सकता है।
BMC का रोड क्लीननेस एंड डस्ट कंट्रोल अभियान
मुंबई महानगरपालिका (BMC) ने इस समस्या से निपटने के लिए विशेष कदम उठाए हैं। 30 नवंबर तक पूरे शहर में ‘रोड क्लीननेस एंड डस्ट कंट्रोल कैंपेन’ चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत सड़कों पर नियमित रूप से पानी का छिड़काव किया जा रहा है ताकि धूल को कम किया जा सके। इसके साथ ही 50 से ज्यादा निर्माण स्थलों पर अस्थायी रूप से काम रोक दिया गया है ताकि प्रदूषण का स्तर कम हो सके। BMC ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि प्रदूषण कम नहीं हुआ तो ग्रैप-4 जैसी कड़ी पाबंदियां लागू की जा सकती हैं।
बॉम्बे हाईकोर्ट की कड़ी चेतावनी
दिल्ली में वायु प्रदूषण की गंभीर स्थिति को देखते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट ने भी मुंबई सरकार को कड़ा निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि दिल्ली की तरह मुंबई में भी अगर त्वरित कदम नहीं उठाए गए तो स्थिति अत्यंत खराब हो सकती है। कोर्ट ने सरकार को सख्त और प्रभावी कार्रवाई करने का आदेश दिया है ताकि आम जनता की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। कोर्ट का यह आदेश प्रदूषण नियंत्रण के लिए एक चेतावनी के रूप में लिया जा रहा है।
प्रदूषण के बढ़ने के कारण और बचाव के उपाय
मुंबई में वायु प्रदूषण के मुख्य कारणों में वाहनों से निकलने वाला धुआं सबसे बड़ा है। बदलते मौसम और धीमी हवा के कारण यह धुआं आसमान में घुल-मिलकर धुंध का रूप ले लेता है, जिससे हवा की गुणवत्ता खराब होती है। इस स्थिति में विशेषज्ञों ने लोगों को घरों में एयर प्यूरीफायर लगाने और बाहर कम से कम निकलने की सलाह दी है। साथ ही सार्वजनिक वाहनों के उपयोग को बढ़ावा देने, निजी वाहनों के कम उपयोग, और कड़े प्रदूषण नियंत्रण नियमों का पालन करना जरूरी है ताकि इस समस्या पर काबू पाया जा सके।



