16 विद्यालयों ने लिया हिस्सा, 6 टीमों ने प्रोजेक्ट और AI टूल्स से दिए प्रेजेंटेशन
NEP 2020 के संदर्भ में शिक्षकों ने कोडिंग, लॉजिकल रीजनिंग और AI की उपयोगिता पर किया मंथन
ग्रेटर नोएडा। शिक्षा में तकनीक के बढ़ते महत्व को देखते हुए राम-ईश इंटरनेशनल स्कूल, ग्रेटर नोएडा में कम्प्यूटेशनल थिंकिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को बढ़ावा देने के लिए जिला स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का आयोजन 29 अगस्त 2026 को किया गया। इसका उद्देश्य छात्रों में तार्किक सोच, समस्या समाधान और तकनीकी समझ विकसित करना रहा।
कार्यशाला में ग्रेटर नोएडा के 16 प्रतिष्ठित विद्यालयों ने भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान 6 टीमों ने प्रोजेक्ट, गतिविधियों और विभिन्न टूल्स के माध्यम से प्रेजेंटेशन प्रस्तुत किए। इनमें यह बताया गया कि कक्षा में कोडिंग, लॉजिकल रीजनिंग, प्रॉब्लम सॉल्विंग और एल्गोरिदम आधारित सोच को खेल एवं प्रोजेक्ट आधारित गतिविधियों के माध्यम से किस तरह विद्यार्थियों तक पहुंचाया जा सकता है।
शिक्षा में कम्प्यूटेशनल थिंकिंग पर रहा जोर
कार्यशाला का मुख्य फोकस कम्प्यूटेशनल थिंकिंग को शिक्षा का हिस्सा बनाने पर रहा। इसका उद्देश्य केवल विद्यार्थियों को कोडिंग सिखाना नहीं, बल्कि उनमें किसी समस्या को समझने, उसे छोटे हिस्सों में बांटने और तार्किक तरीके से समाधान खोजने की क्षमता विकसित करना है।
कार्यशाला में प्रस्तुत किए गए प्रोजेक्ट और गतिविधियों के जरिए इस बात पर जोर दिया गया कि तकनीकी शिक्षा को केवल कंप्यूटर स्क्रीन तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। इसके बजाय इसे विद्यार्थियों की रोजमर्रा की सीखने की प्रक्रिया से जोड़ा जा सकता है।
इस दौरान टीमों ने अलग-अलग प्रोजेक्ट और टूल्स के जरिए अपने विचार प्रस्तुत किए। प्रस्तुतियों में खेल और प्रोजेक्ट आधारित गतिविधियों के माध्यम से कोडिंग तथा तार्किक सोच विकसित करने के तरीकों को प्रदर्शित किया गया।
16 विद्यालयों की रही भागीदारी
जिला स्तरीय कार्यशाला में ग्रेटर नोएडा के कुल 16 विद्यालयों ने हिस्सा लिया। विभिन्न विद्यालयों की टीमों ने अपने अनुभव और गतिविधियां साझा कीं।
कार्यशाला का एक महत्वपूर्ण पहलू यह रहा कि इसमें केवल सैद्धांतिक चर्चा तक कार्यक्रम सीमित नहीं रहा। 6 टीमों ने अपने प्रोजेक्ट, गतिविधियों और टूल्स के माध्यम से प्रेजेंटेशन दिए।
इन प्रस्तुतियों में यह दिखाने का प्रयास किया गया कि विद्यार्थियों को कम्प्यूटेशनल थिंकिंग सिखाने के लिए कक्षा में किस तरह व्यावहारिक गतिविधियों का इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे शिक्षकों को भी अलग-अलग तरीकों को समझने और अपने स्कूलों में लागू करने के अवसर मिले।
प्रधानाचार्या शिखा सिंह ने किया स्वागत
कार्यक्रम का शुभारंभ राम-ईश इंटरनेशनल स्कूल की प्रधानाचार्या शिखा सिंह के स्वागत भाषण से हुआ। उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में तकनीक की बढ़ती भूमिका पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि 21वीं सदी में तकनीक के साथ चलना हर छात्र के लिए जरूरी है। राम-ईश इंटरनेशनल स्कूल में कोडिंग क्लब, AI लैब और प्रोजेक्ट आधारित सीखने पर जोर दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि उद्देश्य बच्चों को केवल तकनीक का उपभोक्ता बनाना नहीं, बल्कि उन्हें तकनीक का निर्माता बनाने की दिशा में तैयार करना है।
प्रधानाचार्या के अनुसार, बदलते तकनीकी दौर में विद्यार्थियों को भविष्य की आवश्यकताओं के लिए तैयार करना शिक्षा व्यवस्था की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
NEP 2020 के संदर्भ में कम्प्यूटेशनल थिंकिंग पर चर्चा
कार्यशाला में निर्णायक मंडल और मुख्य वक्ताओं ने भी शिक्षा में कम्प्यूटेशनल थिंकिंग के महत्व पर विचार रखे। कार्यक्रम में श्री नीरज अवस्थी, प्रधानाचार्य, मॉर्डन स्कूल, नोएडा; श्रीमती गार्गी घोष कंसबनिक, प्रधानाचार्या, एस.डी.आर.वी. कॉन्वेंट स्कूल; तथा डॉ. विश्वदीप सिंह बघेला, प्रोफेसर एवं रिसर्च एसोसिएट, गलगोटिया विश्वविद्यालय शामिल रहे।
सभी ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति यानी NEP 2020 के संदर्भ में कम्प्यूटेशनल थिंकिंग के महत्व पर प्रकाश डाला।
चर्चा में इस बात पर जोर रहा कि विद्यार्थियों को भविष्य की तकनीकी जरूरतों के अनुरूप तैयार करने के लिए शिक्षा में तार्किक सोच, समस्या समाधान और तकनीकी कौशल को बढ़ावा देना जरूरी है।
AI लैब और कोडिंग क्लब के अनुभव किए साझा
मेजबान विद्यालय की ओर से मैडम नेहा सेठ और मैडम नेहा तिवारी ने स्कूल स्तर पर AI लैब और कोडिंग क्लब शुरू करने के अपने अनुभव साझा किए।
उन्होंने इस दिशा में स्कूल में किए जा रहे प्रयासों के बारे में जानकारी दी। साथ ही ज्ञानवर्धक प्रेजेंटेशन भी प्रस्तुत किया।
AI लैब और कोडिंग क्लब जैसे माध्यम विद्यार्थियों को तकनीक के साथ व्यावहारिक रूप से जुड़ने का अवसर दे सकते हैं। ऐसे मंचों के जरिए बच्चे केवल पाठ्यक्रम आधारित जानकारी हासिल करने के बजाय प्रोजेक्ट और गतिविधियों के माध्यम से सीख सकते हैं।
खेल और प्रोजेक्ट आधारित सीखने को बढ़ावा
कार्यशाला में इस बात पर भी जोर रहा कि विद्यार्थियों को तकनीकी अवधारणाएं समझाने के लिए केवल पारंपरिक शिक्षण पद्धति पर निर्भर रहने के बजाय गतिविधि आधारित तरीकों का इस्तेमाल किया जा सकता है।
6 टीमों द्वारा प्रस्तुत प्रोजेक्ट और गतिविधियों में खेल तथा प्रोजेक्ट आधारित सीखने के माध्यम से कोडिंग, लॉजिकल रीजनिंग और समस्या समाधान जैसी क्षमताओं को विकसित करने के तरीकों पर प्रस्तुति दी गई।
इस तरह की गतिविधियों से विद्यार्थियों को किसी समस्या के समाधान के लिए चरणबद्ध तरीके से सोचने की आदत विकसित करने में मदद मिल सकती है। इसी संदर्भ में कम्प्यूटेशनल थिंकिंग को भविष्य की शिक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया गया।
AI के दौर के लिए छात्रों को तैयार करने पर जोर
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तेजी से शिक्षा और कामकाज के विभिन्न क्षेत्रों का हिस्सा बन रहा है। ऐसे में विद्यार्थियों को AI के बारे में समझ विकसित करने के साथ-साथ उसका जिम्मेदारी से इस्तेमाल करना सिखाना भी महत्वपूर्ण है।
कार्यशाला का उद्देश्य छात्रों को AI के युग के लिए तैयार करने की दिशा में शिक्षकों के बीच विचार और अनुभव साझा करना रहा। कार्यक्रम में AI और कम्प्यूटेशनल सोच को शिक्षा के साथ जोड़ने के व्यावहारिक तरीकों पर चर्चा हुई।
विद्यालय स्तर पर AI लैब और कोडिंग क्लब जैसे प्रयासों को भी इसी दिशा में उपयोगी पहल के रूप में प्रस्तुत किया गया।
नियमित आयोजन की जरूरत पर बनी सहमति
कार्यशाला के अंत में प्रतिभागियों ने इस बात पर सहमति जताई कि इस तरह के आयोजन नियमित रूप से होने चाहिए। ऐसे आयोजनों से शिक्षकों को नई तकनीकों और शिक्षण पद्धतियों को समझने का अवसर मिलता है।
साथ ही, विभिन्न विद्यालयों के बीच अनुभव साझा करने से शिक्षा में तकनीक के उपयोग के नए तरीके सामने आ सकते हैं।
कार्यक्रम में यह विचार प्रमुख रहा कि शिक्षकों और छात्रों दोनों को AI आधारित भविष्य के लिए तैयार करने की जरूरत है। इसके लिए कम्प्यूटेशनल थिंकिंग, कोडिंग, लॉजिकल रीजनिंग और प्रॉब्लम सॉल्विंग जैसी क्षमताओं को शिक्षा में लगातार बढ़ावा देने पर ध्यान दिया जाना चाहिए।
राम-ईश इंटरनेशनल स्कूल में आयोजित यह जिला स्तरीय कार्यशाला इसी दिशा में शिक्षकों और विद्यालयों के बीच संवाद और अनुभव साझा करने का एक मंच बनी। कार्यक्रम में प्रस्तुत प्रोजेक्ट, गतिविधियों और अनुभवों ने तकनीक आधारित शिक्षा को कक्षा की सीखने की प्रक्रिया से जोड़ने पर जोर दिया।


