घोड़ी-बछेड़ा शहीद पार्क से सुबह 10 बजे निकलेगा शांतिपूर्ण पैदल मार्च
किसानों का दावा- न यूनियन, न राजनीतिक दल, सीधे किसानों के नेतृत्व में होगा आंदोलन
44 गांवों के किसानों ने किया आंदोलन का ऐलान
ग्रेटर नोएडा। 4 प्रतिशत आबादी के अधिकार की मांग को लेकर किसानों ने अब आंदोलन तेज करने का ऐलान किया है। बुधवार को ग्रेटर नोएडा जर्नलिस्ट प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस वार्ता में किसानों ने अपनी आगामी रणनीति की जानकारी दी। किसानों के अनुसार, 44 गांवों के हजारों किसान लंबे समय से अपने 4 प्रतिशत आबादी के अधिकार से वंचित हैं।
किसानों ने कहा कि इस मांग को लेकर कई बार संबंधित अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से संपर्क किया गया। हालांकि, उनके मुताबिक, हर बार आश्वासन मिला, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका। अब किसानों ने सीधे अपने नेतृत्व में आंदोलन करने का फैसला लिया है।
2 सितंबर को प्राधिकरण तक पैदल मार्च
किसानों ने बताया कि आगामी 2 सितंबर को सुबह 10 बजे घोड़ी-बजेड़ा शहीद पार्क से ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण कार्यालय तक शांतिपूर्ण पैदल मार्च निकाला जाएगा। इसके बाद किसान प्राधिकरण अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर 4 प्रतिशत आबादी के लंबित अधिकारों के निस्तारण की मांग करेंगे।
किसानों का कहना है कि यह मार्च पूरी तरह शांतिपूर्ण तरीके से निकाला जाएगा। इसका उद्देश्य अपनी मांग को प्राधिकरण और प्रशासन के सामने मजबूती से रखना है।
उन्होंने क्षेत्र के सभी वंचित किसानों से अपील की है कि वे निर्धारित समय पर शहीद पार्क पहुंचें और इस आंदोलन में शामिल होकर एकजुटता दिखाएं।
किसानों के नेतृत्व में होगा आंदोलन
प्रेस वार्ता में किसानों ने विशेष रूप से कहा कि 2 सितंबर का आंदोलन किसी राजनीतिक दल या किसान संगठन के बैनर तले नहीं होगा। किसानों के मुताबिक, इसमें न कोई किसान यूनियन शामिल होगी और न ही किसी राजनीतिक दल के नेता की अगुवाई होगी।
किसानों ने इसे सीधे तौर पर पीड़ित किसानों के अधिकारों की लड़ाई बताया। उनका कहना है कि जिन किसानों का 4 प्रतिशत आबादी का हक लंबित है, वही इस संघर्ष का नेतृत्व करेंगे।
उन्होंने कहा कि जमीन और आबादी से जुड़े अधिकार किसानों के भविष्य से जुड़े हुए हैं। इसलिए अब वे किसी राजनीतिक हस्तक्षेप के बजाय स्वयं अपनी मांग को प्राधिकरण के सामने रखने की तैयारी कर रहे हैं।
आश्वासन से काम नहीं चलेगा, किसानों को चाहिए अपना हक
किसानों ने आरोप लगाया कि उन्होंने अपनी मांगों को लेकर कई बार जनप्रतिनिधियों और प्राधिकरण अधिकारियों से मुलाकात की है। इस दौरान उन्हें समस्याओं के समाधान का आश्वासन दिया गया। हालांकि, किसानों के अनुसार, लंबे समय बाद भी धरातल पर अपेक्षित समाधान नहीं हुआ।
किसानों ने कहा कि अब केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा। उन्हें अपने अधिकारों का वास्तविक निस्तारण चाहिए। इसी उद्देश्य से पैदल मार्च का निर्णय लिया गया है।
उन्होंने कहा कि किसान शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखेंगे। ज्ञापन के माध्यम से अधिकारियों से मांग की जाएगी कि लंबित मामलों की स्थिति स्पष्ट की जाए और पात्र किसानों के अधिकारों का जल्द निस्तारण किया जाए।
44 गांवों के हजारों किसानों का दावा
किसानों के अनुसार, ग्रेटर नोएडा क्षेत्र के 44 गांवों के हजारों किसान 4 प्रतिशत आबादी के अधिकार से जुड़े मामले का सामना कर रहे हैं। उनका कहना है कि यह मुद्दा लंबे समय से लंबित है और इससे बड़ी संख्या में ग्रामीण परिवार प्रभावित हैं।
किसानों ने मांग की कि प्राधिकरण इस मामले में स्पष्ट रोडमैप तैयार करे। साथ ही पात्र किसानों के मामलों का पारदर्शी तरीके से निस्तारण किया जाए।
उनका कहना है कि जब तक इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं होता, तब तक किसानों का असंतोष बना रहेगा। इसलिए प्राधिकरण को किसानों की मांग पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
मांग पूरी नहीं हुई तो आंदोलन होगा बड़ा
किसानों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि 2 सितंबर के पैदल मार्च और ज्ञापन के बाद भी उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
किसानों ने कहा कि वे आगे की रणनीति आपसी सहमति से तय करेंगे। जरूरत पड़ने पर प्राधिकरण के खिलाफ बड़े स्तर पर लोकतांत्रिक आंदोलन किया जाएगा।
इसके साथ ही किसानों ने आगामी विधानसभा चुनाव में जनप्रतिनिधियों के विरोध की भी चेतावनी दी है। किसानों का कहना है कि लंबे समय से लंबित मुद्दों का समाधान नहीं होने पर वे चुनाव के दौरान भी अपनी नाराजगी दर्ज करा सकते हैं।
जनप्रतिनिधियों से भी जवाबदेही की मांग
किसानों ने कहा कि क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों की भी जिम्मेदारी है कि वे ग्रामीणों की समस्याओं को संबंधित प्राधिकरण और सरकार के सामने मजबूती से रखें। किसानों के अनुसार, यदि बार-बार मांग उठाने के बावजूद समाधान नहीं होता है तो उन्हें अपनी रणनीति पर पुनर्विचार करना पड़ेगा।
हालांकि, किसानों द्वारा लगाए गए आरोपों और 4 प्रतिशत आबादी के अधिकार से जुड़े दावों की संबंधित प्राधिकरण की ओर से प्रतिक्रिया इस जानकारी में उपलब्ध नहीं है। ऐसे में मामले में प्राधिकरण का पक्ष सामने आना भी महत्वपूर्ण होगा।
शांतिपूर्ण मार्च में शामिल होने की अपील
किसानों ने 44 गांवों के सभी वंचित किसानों से 2 सितंबर को घोड़ी-बजेड़ा शहीद पार्क पहुंचने की अपील की है। उन्होंने कहा कि एकजुट होकर अपनी मांग रखने से प्राधिकरण तक किसानों की आवाज मजबूती से पहुंचेगी।
किसानों ने दोहराया कि उनका आंदोलन शांतिपूर्ण रहेगा। उनका मुख्य उद्देश्य 4 प्रतिशत आबादी के अधिकार से जुड़े लंबित मामलों का समाधान कराना है। अब देखना होगा कि 2 सितंबर को होने वाले पैदल मार्च के बाद प्राधिकरण की ओर से किसानों की मांग पर क्या कदम उठाया जाता है।


