उत्तर प्रदेश में भूमि से जुड़े धोखाधड़ी, जालसाजी और लंबी अदालत की लड़ाइयों का दौर अब समाप्त हो सकता है। योगी आदित्यनाथ सरकार ने राज्य में संपत्ति रजिस्ट्रेशन के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब रजिस्ट्रेशन दस्तावेज़ आधारित नहीं, बल्कि टाइटल (मालिकाना हक) आधारित होगा। यह कदम न केवल रियल एस्टेट मार्केट में पारदर्शिता लाएगा बल्कि घर और जमीन खरीदने वालों को सुरक्षा का एक नया भरोसेमंद स्तर भी देगा।
क्यों उठाया गया यह कदम?
उत्तर प्रदेश में अब तक रजिस्ट्रेशन केवल विक्रेता और खरीदार द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों के आधार पर होता था। इसके कारण नकली दस्तावेजों के ज़रिए गलत तरीके से संपत्ति पर कब्जा किया जाता था। एक ही जमीन कई बार बेची जाती थी और हजारों मामले कोर्ट में लंबित रहते थे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस गंभीर समस्या को समझते हुए रजिस्ट्रेशन विभाग को निर्देश दिया कि वह तकनीक और जांच पर आधारित एक सुरक्षित प्रणाली लागू करे। इसी का परिणाम है टाइटल आधारित रजिस्ट्रेशन मॉडल।
टाइटल आधारित रजिस्ट्रेशन मॉडल क्या है?
कानूनी विशेषज्ञ अवनीश शर्मा के अनुसार, अब सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि संपत्ति बेचने वाला व्यक्ति असली मालिक हो। इसके लिए राजस्व विभाग, नगर निकाय और रजिस्ट्रेशन विभाग के रिकॉर्ड को आपस में जोड़ा जाएगा। उप-रजिस्ट्रार ऑनलाइन रिकॉर्ड के जरिए जमीन या संपत्ति के असली मालिक की सीधे जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। केवल उन लेनदेन को रजिस्टर किया जाएगा जिनमें विक्रेता के नाम पर साफ सुथरा टाइटल होगा। यह मॉडल दिल्ली और हरियाणा जैसे राज्यों में पहले से लागू है और वहां सफल साबित हो चुका है।
खरीदारों के लिए फायदे
इस बदलाव से सबसे बड़ा लाभ संपत्ति खरीदने वालों को सुरक्षा और भरोसे की मिलेगी। नकली रजिस्ट्रेशन, दोगुनी बिक्री और छुपे विवादों की संभावना कम हो जाएगी। सरकार द्वारा टाइटल की पहले ही जांच हो जाने से खरीदारों के लिए सावधानी बरतना आसान होगा। इसके साथ ही लंबी कोर्ट की लड़ाइयों और जमीन विवादों में काफी कमी आएगी। हालांकि, विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि खरीदार खुद भी उन दस्तावेजों की जांच करें जो रजिस्ट्रेबल नहीं हैं।
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा अपनाया गया यह टाइटल आधारित रजिस्ट्रेशन मॉडल राज्य में जमीन और संपत्ति के कारोबार को पारदर्शी और सुरक्षित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे न केवल निवेशकों और आम जनता को भरोसा मिलेगा बल्कि जमीन से जुड़े भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी पर भी रोक लगेगी। आने वाले समय में इस बदलाव से उत्तर प्रदेश की रियल एस्टेट इंडस्ट्री में स्थिरता और विकास होगा। खरीदारों के लिए यह एक सुनहरा मौका है कि वे अपनी संपत्ति के मामले में अब और ज्यादा सुरक्षित महसूस करें और अपने निवेश को बेहतर तरीके से संरक्षित करें।



