Friday, November 6, 2026
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शारदा यूनिवर्सिटी में ‘दीवाली धमाल 2026’ और ‘दीपोत्सव 2026’ की धूम, रोशनी और सांस्कृतिक रंगों से जगमगाया परिसर

दीवाली धमाल में पारंपरिक परिधानों, संगीत और नृत्य से सजा उत्सव

दीपोत्सव में एक साथ जलाए गए दीप, एकता और सद्भाव का दिया संदेश

ग्रेटर नोएडा। शारदा यूनिवर्सिटी में दीपावली का पर्व उत्साह, उमंग और पारंपरिक उल्लास के साथ मनाया गया। यूनिवर्सिटी परिसर में आयोजित ‘दीवाली धमाल 2026’ और ‘दीपोत्सव 2026’ कार्यक्रमों के दौरान रोशनी, संगीत, नृत्य और सांस्कृतिक गतिविधियों की शानदार छटा देखने को मिली। इन आयोजनों में यूनिवर्सिटी के फैकल्टी सदस्यों और स्टाफ ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। कार्यक्रमों के माध्यम से आपसी एकता, भाईचारे और भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं का संदेश दिया गया।

मुख्य बिंदु

  • शारदा यूनिवर्सिटी में ‘दीवाली धमाल 2026’ का भव्य आयोजन।
  • मानव संसाधन विभाग ने आयोजित किया एथनिक डे और सांस्कृतिक कार्यक्रम।
  • डीन स्टूडेंट्स वेलफेयर की ओर से मंदिर परिसर में हुआ दीपोत्सव।
  • प्रो-चांसलर प्रो. वाई. के. गुप्ता ने आयोजन को बताया एकता और सद्भाव का प्रतीक।
  • वाइस-चांसलर डॉ. सिबाराम खारा सहित वरिष्ठ अधिकारियों और कर्मचारियों ने लिया हिस्सा।

दीवाली धमाल 2026 में दिखे भारतीय संस्कृति के रंग

शारदा यूनिवर्सिटी में दीपावली समारोह की शुरुआत ‘दीवाली धमाल 2026’ से हुई। मानव संसाधन विभाग (HR Department) की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम को सांस्कृतिक उत्सव और एथनिक डे के रूप में मनाया गया। इसका उद्देश्य यूनिवर्सिटी के फैकल्टी सदस्यों और कर्मचारियों को एक साथ लाकर त्योहार की खुशियां साझा करना था।

कार्यक्रम में फैकल्टी सदस्य और स्टाफ पारंपरिक भारतीय परिधानों में नजर आए। रंग-बिरंगे परिधानों और पारंपरिक वेशभूषा ने आयोजन की खूबसूरती को और बढ़ा दिया। परिसर को आकर्षक सजावट और पारंपरिक कलाकृतियों से सजाया गया था। पूरे आयोजन स्थल पर दीपावली के उत्सव जैसा माहौल दिखाई दिया।

इस दौरान सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, संगीत और नृत्य कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इसके साथ ही त्योहार से जुड़ी विभिन्न मनोरंजक और इंटरैक्टिव गतिविधियां भी आयोजित की गईं। कर्मचारियों ने इन गतिविधियों में उत्साहपूर्वक भाग लिया। संगीत और नृत्य की प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए।

आयोजन की खास बात यह रही कि इसमें यूनिवर्सिटी के अलग-अलग विभागों के सदस्यों को एक साथ उत्सव मनाने का अवसर मिला। रोजमर्रा के शैक्षणिक और प्रशासनिक कार्यों से अलग इस कार्यक्रम ने सहकर्मियों के बीच संवाद और आपसी जुड़ाव को मजबूत करने का अवसर प्रदान किया।

दीपोत्सव 2026 में रोशनी से जगमगाया मंदिर परिसर

दीवाली धमाल के बाद उत्सव का अगला चरण ‘दीपोत्सव 2026’ रहा। डीन स्टूडेंट्स वेलफेयर (DSW) की ओर से इसका आयोजन शारदा यूनिवर्सिटी के मंदिर परिसर में किया गया। इस अवसर पर फैकल्टी सदस्यों और स्टाफ ने एक साथ मिलकर दीप प्रज्वलित किए।

एक साथ जलते सैकड़ों दीपों की रोशनी से मंदिर परिसर का वातावरण बेहद आकर्षक और आध्यात्मिक नजर आया। दीपों की जगमगाहट ने दीपावली के पारंपरिक महत्व को जीवंत कर दिया। इस आयोजन में प्रकाश, सकारात्मकता, आशा और आपसी सद्भाव का संदेश प्रमुख रूप से दिखाई दिया।

दीपावली भारतीय संस्कृति का एक महत्वपूर्ण त्योहार है। यह पर्व अंधकार पर प्रकाश, अज्ञान पर ज्ञान और निराशा पर आशा की जीत का प्रतीक माना जाता है। दीपोत्सव के माध्यम से यूनिवर्सिटी ने इन्हीं सांस्कृतिक और आध्यात्मिक मूल्यों को आगे बढ़ाने का प्रयास किया।

मंदिर परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम ने भारतीय परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत के प्रति सम्मान की भावना को भी मजबूत किया। साथ ही, इसने शारदा परिवार के सदस्यों को एक साझा मंच पर एकत्रित होकर त्योहार मनाने का अवसर दिया।

प्रो. वाई. के. गुप्ता ने एकता और सामुदायिक भावना को बताया महत्वपूर्ण

इस अवसर पर शारदा यूनिवर्सिटी के प्रो-चांसलर प्रो. वाई. के. गुप्ता ने कहा कि दीपावली अंधकार पर प्रकाश, अज्ञान पर ज्ञान और निराशा पर आशा की जीत का प्रतीक है। ऐसे आयोजन यूनिवर्सिटी के सहकर्मियों के बीच आपसी संबंधों को मजबूत करने और सांस्कृतिक समझ को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

उन्होंने कहा कि इस तरह के कार्यक्रम एकता, सद्भाव और आपसी सम्मान जैसे मूल्यों को सुदृढ़ करने का अवसर प्रदान करते हैं। फैकल्टी सदस्यों और स्टाफ की उत्साहपूर्ण भागीदारी शारदा परिवार की मजबूत सामुदायिक भावना को दर्शाती है।

प्रो. गुप्ता ने इन यादगार आयोजनों के सफल आयोजन के लिए मानव संसाधन विभाग और डीन स्टूडेंट्स वेलफेयर की टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यूनिवर्सिटी में इस प्रकार के सांस्कृतिक कार्यक्रम सकारात्मक और समावेशी वातावरण तैयार करने में सहायक होते हैं।

वाइस-चांसलर सहित वरिष्ठ अधिकारियों ने लिया हिस्सा

दीपावली समारोह में शारदा यूनिवर्सिटी के वाइस-चांसलर डॉ. सिबाराम खारा भी शामिल हुए। इसके अलावा यूनिवर्सिटी के वरिष्ठ अधिकारी, डीन, विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष, फैकल्टी सदस्य और कर्मचारी भी कार्यक्रम का हिस्सा बने।

सभी ने मिलकर दीपावली की खुशियां साझा कीं। दोनों आयोजनों में कर्मचारियों की भागीदारी ने यूनिवर्सिटी के सामूहिक और सांस्कृतिक जीवन को एक नई ऊर्जा प्रदान की।

सांस्कृतिक परंपराओं और आपसी जुड़ाव का संदेश देकर संपन्न हुआ उत्सव

‘दीवाली धमाल 2026’ और ‘दीपोत्सव 2026’ के माध्यम से शारदा यूनिवर्सिटी ने दीपावली को केवल एक त्योहार के रूप में नहीं, बल्कि आपसी सहयोग, सम्मान और एकजुटता के उत्सव के रूप में मनाया।

दीप जलाने के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। रोशनी से जगमगाते परिसर में त्योहार की खुशियां और सकारात्मकता का माहौल बना रहा।

इन आयोजनों ने यह संदेश दिया कि शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका केवल शिक्षा और शोध तक सीमित नहीं है। विद्यार्थियों, फैकल्टी सदस्यों और कर्मचारियों के लिए सांस्कृतिक गतिविधियां भी महत्वपूर्ण हैं। ऐसे कार्यक्रम लोगों को एक-दूसरे की परंपराओं और विचारों को समझने का अवसर देते हैं।

शारदा यूनिवर्सिटी के इन आयोजनों ने भारतीय सांस्कृतिक विरासत को सहेजने और अपने फैकल्टी तथा स्टाफ के बीच अपनापन, भाईचारा और सामुदायिक भावना को मजबूत करने की प्रतिबद्धता को एक बार फिर प्रदर्शित किया।

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शारदा यूनिवर्सिटी में ‘दीवाली धमाल 2026’ और ‘दीपोत्सव 2026’ की धूम, रोशनी और सांस्कृतिक रंगों से जगमगाया परिसर

दीवाली धमाल में पारंपरिक परिधानों, संगीत और नृत्य से सजा उत्सव

दीपोत्सव में एक साथ जलाए गए दीप, एकता और सद्भाव का दिया संदेश

ग्रेटर नोएडा। शारदा यूनिवर्सिटी में दीपावली का पर्व उत्साह, उमंग और पारंपरिक उल्लास के साथ मनाया गया। यूनिवर्सिटी परिसर में आयोजित ‘दीवाली धमाल 2026’ और ‘दीपोत्सव 2026’ कार्यक्रमों के दौरान रोशनी, संगीत, नृत्य और सांस्कृतिक गतिविधियों की शानदार छटा देखने को मिली। इन आयोजनों में यूनिवर्सिटी के फैकल्टी सदस्यों और स्टाफ ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। कार्यक्रमों के माध्यम से आपसी एकता, भाईचारे और भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं का संदेश दिया गया।

मुख्य बिंदु

  • शारदा यूनिवर्सिटी में ‘दीवाली धमाल 2026’ का भव्य आयोजन।
  • मानव संसाधन विभाग ने आयोजित किया एथनिक डे और सांस्कृतिक कार्यक्रम।
  • डीन स्टूडेंट्स वेलफेयर की ओर से मंदिर परिसर में हुआ दीपोत्सव।
  • प्रो-चांसलर प्रो. वाई. के. गुप्ता ने आयोजन को बताया एकता और सद्भाव का प्रतीक।
  • वाइस-चांसलर डॉ. सिबाराम खारा सहित वरिष्ठ अधिकारियों और कर्मचारियों ने लिया हिस्सा।

दीवाली धमाल 2026 में दिखे भारतीय संस्कृति के रंग

शारदा यूनिवर्सिटी में दीपावली समारोह की शुरुआत ‘दीवाली धमाल 2026’ से हुई। मानव संसाधन विभाग (HR Department) की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम को सांस्कृतिक उत्सव और एथनिक डे के रूप में मनाया गया। इसका उद्देश्य यूनिवर्सिटी के फैकल्टी सदस्यों और कर्मचारियों को एक साथ लाकर त्योहार की खुशियां साझा करना था।

कार्यक्रम में फैकल्टी सदस्य और स्टाफ पारंपरिक भारतीय परिधानों में नजर आए। रंग-बिरंगे परिधानों और पारंपरिक वेशभूषा ने आयोजन की खूबसूरती को और बढ़ा दिया। परिसर को आकर्षक सजावट और पारंपरिक कलाकृतियों से सजाया गया था। पूरे आयोजन स्थल पर दीपावली के उत्सव जैसा माहौल दिखाई दिया।

इस दौरान सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, संगीत और नृत्य कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इसके साथ ही त्योहार से जुड़ी विभिन्न मनोरंजक और इंटरैक्टिव गतिविधियां भी आयोजित की गईं। कर्मचारियों ने इन गतिविधियों में उत्साहपूर्वक भाग लिया। संगीत और नृत्य की प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए।

आयोजन की खास बात यह रही कि इसमें यूनिवर्सिटी के अलग-अलग विभागों के सदस्यों को एक साथ उत्सव मनाने का अवसर मिला। रोजमर्रा के शैक्षणिक और प्रशासनिक कार्यों से अलग इस कार्यक्रम ने सहकर्मियों के बीच संवाद और आपसी जुड़ाव को मजबूत करने का अवसर प्रदान किया।

दीपोत्सव 2026 में रोशनी से जगमगाया मंदिर परिसर

दीवाली धमाल के बाद उत्सव का अगला चरण ‘दीपोत्सव 2026’ रहा। डीन स्टूडेंट्स वेलफेयर (DSW) की ओर से इसका आयोजन शारदा यूनिवर्सिटी के मंदिर परिसर में किया गया। इस अवसर पर फैकल्टी सदस्यों और स्टाफ ने एक साथ मिलकर दीप प्रज्वलित किए।

एक साथ जलते सैकड़ों दीपों की रोशनी से मंदिर परिसर का वातावरण बेहद आकर्षक और आध्यात्मिक नजर आया। दीपों की जगमगाहट ने दीपावली के पारंपरिक महत्व को जीवंत कर दिया। इस आयोजन में प्रकाश, सकारात्मकता, आशा और आपसी सद्भाव का संदेश प्रमुख रूप से दिखाई दिया।

दीपावली भारतीय संस्कृति का एक महत्वपूर्ण त्योहार है। यह पर्व अंधकार पर प्रकाश, अज्ञान पर ज्ञान और निराशा पर आशा की जीत का प्रतीक माना जाता है। दीपोत्सव के माध्यम से यूनिवर्सिटी ने इन्हीं सांस्कृतिक और आध्यात्मिक मूल्यों को आगे बढ़ाने का प्रयास किया।

मंदिर परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम ने भारतीय परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत के प्रति सम्मान की भावना को भी मजबूत किया। साथ ही, इसने शारदा परिवार के सदस्यों को एक साझा मंच पर एकत्रित होकर त्योहार मनाने का अवसर दिया।

प्रो. वाई. के. गुप्ता ने एकता और सामुदायिक भावना को बताया महत्वपूर्ण

इस अवसर पर शारदा यूनिवर्सिटी के प्रो-चांसलर प्रो. वाई. के. गुप्ता ने कहा कि दीपावली अंधकार पर प्रकाश, अज्ञान पर ज्ञान और निराशा पर आशा की जीत का प्रतीक है। ऐसे आयोजन यूनिवर्सिटी के सहकर्मियों के बीच आपसी संबंधों को मजबूत करने और सांस्कृतिक समझ को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

उन्होंने कहा कि इस तरह के कार्यक्रम एकता, सद्भाव और आपसी सम्मान जैसे मूल्यों को सुदृढ़ करने का अवसर प्रदान करते हैं। फैकल्टी सदस्यों और स्टाफ की उत्साहपूर्ण भागीदारी शारदा परिवार की मजबूत सामुदायिक भावना को दर्शाती है।

प्रो. गुप्ता ने इन यादगार आयोजनों के सफल आयोजन के लिए मानव संसाधन विभाग और डीन स्टूडेंट्स वेलफेयर की टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यूनिवर्सिटी में इस प्रकार के सांस्कृतिक कार्यक्रम सकारात्मक और समावेशी वातावरण तैयार करने में सहायक होते हैं।

वाइस-चांसलर सहित वरिष्ठ अधिकारियों ने लिया हिस्सा

दीपावली समारोह में शारदा यूनिवर्सिटी के वाइस-चांसलर डॉ. सिबाराम खारा भी शामिल हुए। इसके अलावा यूनिवर्सिटी के वरिष्ठ अधिकारी, डीन, विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष, फैकल्टी सदस्य और कर्मचारी भी कार्यक्रम का हिस्सा बने।

सभी ने मिलकर दीपावली की खुशियां साझा कीं। दोनों आयोजनों में कर्मचारियों की भागीदारी ने यूनिवर्सिटी के सामूहिक और सांस्कृतिक जीवन को एक नई ऊर्जा प्रदान की।

सांस्कृतिक परंपराओं और आपसी जुड़ाव का संदेश देकर संपन्न हुआ उत्सव

‘दीवाली धमाल 2026’ और ‘दीपोत्सव 2026’ के माध्यम से शारदा यूनिवर्सिटी ने दीपावली को केवल एक त्योहार के रूप में नहीं, बल्कि आपसी सहयोग, सम्मान और एकजुटता के उत्सव के रूप में मनाया।

दीप जलाने के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। रोशनी से जगमगाते परिसर में त्योहार की खुशियां और सकारात्मकता का माहौल बना रहा।

इन आयोजनों ने यह संदेश दिया कि शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका केवल शिक्षा और शोध तक सीमित नहीं है। विद्यार्थियों, फैकल्टी सदस्यों और कर्मचारियों के लिए सांस्कृतिक गतिविधियां भी महत्वपूर्ण हैं। ऐसे कार्यक्रम लोगों को एक-दूसरे की परंपराओं और विचारों को समझने का अवसर देते हैं।

शारदा यूनिवर्सिटी के इन आयोजनों ने भारतीय सांस्कृतिक विरासत को सहेजने और अपने फैकल्टी तथा स्टाफ के बीच अपनापन, भाईचारा और सामुदायिक भावना को मजबूत करने की प्रतिबद्धता को एक बार फिर प्रदर्शित किया।

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