Thursday, October 8, 2026
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दनकौर में पुश्तैनी आबादी पर बुलडोजर कार्रवाई का आरोप, DM से न्याय की गुहार

बिना नोटिस मकान और बाउंड्री तोड़ने का आरोप, पीड़ितों ने 80 लाख रुपये के नुकसान का दावा

तहसीलदार को DM बताकर डराने और मोबाइल छीनने का भी आरोप, FIR व विभागीय जांच की मांग

दनकौर/गौतमबुद्धनगर। गौतमबुद्धनगर के दनकौर देहात में पुश्तैनी आबादी की जमीन पर बिना पूर्व सूचना और नोटिस जेसीबी चलाकर मकान व बाउंड्री तोड़ने का मामला सामने आया है। पीड़ित परिवार ने जिलाधिकारी गौतमबुद्धनगर को प्रार्थना पत्र देकर कार्रवाई और न्याय की मांग की है। शिकायत में करीब 80 लाख रुपये के नुकसान का दावा किया गया है।

शिकायत के अनुसार मामला ग्राम दनकौर देहात स्थित खसरा संख्या 436, रकबा 0.7021 हेक्टेयर और खाता संख्या 00135 की दादालाही पुश्तैनी आबादी भूमि से जुड़ा है। पीड़ित परिवार का कहना है कि 25 अगस्त 2026 को उनके मकान और पुरानी बाउंड्री को जेसीबी से तोड़ दिया गया।

शिकायत में नगर पंचायत अध्यक्ष और अधिकारियों पर लगाए आरोप

पीड़ित राजकुमार और आजाद सिंह पुत्रगण स्वर्गीय पीतम सिंह तथा अनिल और सुबोध पुत्रगण स्वर्गीय गजराज सिंह, निवासी गढ़ी मोहल्ला दनकौर ने जिलाधिकारी को दिए प्रार्थना पत्र में कई गंभीर आरोप लगाए हैं।

शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि 25 अगस्त को नगर पंचायत दनकौर की वर्तमान चेयरमैन राजवती पत्नी जय सिंह और उनके पुत्र दीपक पुत्र जय सिंह के कथित षड्यंत्र के तहत तहसीलदार सदर पूजा, कानूनगो किरणपाल बिधूड़ी, पटवारी शीतला प्रसाद और कुछ अन्य लोग दो जेसीबी मशीनों के साथ मौके पर पहुंचे।

पीड़ितों का दावा है कि कार्रवाई के दौरान तहसील और नगर पंचायत से जुड़े लोगों ने तहसीलदार की ओर इशारा करते हुए उन्हें बताया कि मौके पर जिलाधिकारी मेधा रूपम आई हैं। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि DM का नाम लेकर परिवार को डराया और दबाव में लिया गया।

हालांकि, बाद में तहसील सदर जाने पर पीड़ितों को कथित तौर पर जानकारी हुई कि मौके पर जिलाधिकारी नहीं, बल्कि तहसीलदार मौजूद थीं।

बिना नोटिस मकान तोड़ने से 80 लाख रुपये के नुकसान का दावा

पीड़ित परिवार के अनुसार, कार्रवाई के दौरान उनके पक्के मकान और पुरानी बाउंड्री को दो जेसीबी मशीनों से तोड़ा गया। शिकायतकर्ताओं ने करीब 80 लाख रुपये के नुकसान का दावा किया है।

आरोप है कि जब परिवार ने कार्रवाई का विरोध किया तो उन्हें पड़ोस के एक मकान में बंद कर दिया गया। शिकायत में मोबाइल फोन छीने जाने और जेल भेजने की धमकी दिए जाने का भी आरोप लगाया गया है।

पीड़ितों का कहना है कि एक व्यक्ति द्वारा पूरी कार्रवाई का वीडियो बनाए जाने की कोशिश की गई, लेकिन उसे भी कथित तौर पर डराकर वहां से भगा दिया गया। बाद में जब गांव के लोग मौके पर पहुंचने लगे तो जेसीबी और अन्य वाहनों से आए लोग वहां से चले गए।

112 पर कॉल के बाद भी कार्रवाई नहीं होने का आरोप

शिकायतकर्ताओं ने बताया कि घटना के दौरान उन्होंने पुलिस की आपातकालीन सेवा 112 पर भी कॉल की थी। शिकायत में EVENT ID P32092605247 और PRB UP32DG 9631 का उल्लेख किया गया है।

पीड़ितों का आरोप है कि मौके पर पहुंची पुलिस ने इसे तहसील और नगर पंचायत से संबंधित मामला बताते हुए तत्काल कार्रवाई नहीं की।

परिवार का कहना है कि इसके बाद उन्होंने तहसील सदर में अधिकारियों से संपर्क किया। वहां कथित तौर पर उन्हें बताया गया कि मौके पर जिलाधिकारी नहीं, बल्कि तहसीलदार मौजूद थीं।

एक महीने से अधिक समय से कार्रवाई का इंतजार

पीड़ितों का आरोप है कि तहसीलदार ने बाद में उनसे जमीन से संबंधित दस्तावेज मांगे और शिकायत आगे न बढ़ाने की बात कही। शिकायत में यह भी दावा किया गया है कि मकान और बाउंड्री दोबारा बनवाने का आश्वासन दिया गया था।

हालांकि, पीड़ित परिवार के अनुसार इसके बाद भी उन्हें एक महीने से अधिक समय से अधिकारियों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं और उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ है। शिकायतकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें संबंधित दस्तावेज जमा करने के बावजूद उचित रिसीविंग नहीं दी गई।

चुनावी रंजिश को कार्रवाई की वजह बता रहे पीड़ित

पीड़ित परिवार ने अपनी शिकायत में कार्रवाई के पीछे कथित चुनावी रंजिश का भी आरोप लगाया है। उनका कहना है कि उनके परिवार के सदस्य ललित नागर पुत्र आजाद सिंह नगर पंचायत दनकौर में कार्यरत थे।

शिकायतकर्ताओं के मुताबिक, ललित नागर को वर्तमान नगर पंचायत अध्यक्ष द्वारा कथित चुनावी रंजिश के चलते नौकरी से हटवा दिया गया था। पीड़ित परिवार का आरोप है कि इसी रंजिश के चलते उनके पुश्तैनी मकान और बाउंड्री पर कार्रवाई कराई गई।

इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष सामने आने पर खबर में उसे भी प्रमुखता से शामिल किया जाएगा।

90 प्रतिशत निर्माण टूटने का दावा, बाकी हिस्से को लेकर चिंता

पीड़ित परिवार का कहना है कि उनके मकान और बाउंड्री का करीब 90 प्रतिशत हिस्सा पहले ही तोड़ा जा चुका है, जबकि लगभग 10 प्रतिशत हिस्सा अभी बचा हुआ है।

परिवार ने शिकायत में दावा किया है कि उन्हें जानकारी मिली है कि बचे हुए हिस्से को भी तोड़ने की तैयारी की जा रही है। इसी आधार पर उन्होंने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप कर शेष निर्माण को नुकसान से बचाने की मांग की है।

DM से मुआवजा, FIR और विभागीय जांच की मांग

पीड़ित परिवार ने जिलाधिकारी से मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनकी प्रमुख मांगों में करीब 80 लाख रुपये के नुकसान की भरपाई, कथित रूप से जिम्मेदार लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करना और ADM स्तर के अधिकारी से विभागीय जांच कराना शामिल है।

इसके साथ ही पीड़ितों ने शेष 10 प्रतिशत निर्माण पर तत्काल रोक लगाने की मांग भी की है, ताकि जांच पूरी होने तक किसी प्रकार की अतिरिक्त कार्रवाई न हो।

शिकायतकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि उन्हें न्याय नहीं मिला तो वे DM कार्यालय पर आत्मदाह और हाईकोर्ट की शरण लेने के लिए मजबूर होंगे। प्रशासन की ओर से इस शिकायत पर क्या कार्रवाई की जाती है, यह आगे महत्वपूर्ण होगा।

प्रशासन के जवाब पर टिकी आगे की कार्रवाई

मामला एक ओर पुश्तैनी आबादी की जमीन, दूसरी ओर प्रशासनिक कार्रवाई और कथित नुकसान से जुड़ा है। ऐसे में पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच के बाद ही आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

फिलहाल पीड़ित परिवार ने जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र देकर अपनी शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत की प्राप्ति पर 28 सितंबर 2026 की तारीख का उल्लेख किया गया है। अब पीड़ितों की नजर प्रशासन की जांच और कार्रवाई पर है।

 

 

 

 

 

 

डिस्क्लेमर: इस समाचार में उल्लेखित आरोप, दावे और घटनाक्रम संबंधित शिकायतकर्ता द्वारा जिलाधिकारी को दिए गए प्रार्थना पत्र एवं उपलब्ध जानकारी के आधार पर प्रकाशित किए गए हैं। Khas Awaaz इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है और न ही किसी व्यक्ति, संस्था अथवा अधिकारी को दोषी ठहरा रहा है। मामले में संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष या प्रशासनिक/कानूनी जांच का निष्कर्ष सामने आने पर उसे भी उचित स्थान दिया जाएगा। पाठकों से अनुरोध है कि समाचार में उल्लिखित आरोपों को अंतिम अथवा न्यायिक रूप से सिद्ध तथ्य न मानें। किसी व्यक्ति या संस्था की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाना Khas Awaaz का उद्देश्य नहीं है।

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दनकौर में पुश्तैनी आबादी पर बुलडोजर कार्रवाई का आरोप, DM से न्याय की गुहार

बिना नोटिस मकान और बाउंड्री तोड़ने का आरोप, पीड़ितों ने 80 लाख रुपये के नुकसान का दावा

तहसीलदार को DM बताकर डराने और मोबाइल छीनने का भी आरोप, FIR व विभागीय जांच की मांग

दनकौर/गौतमबुद्धनगर। गौतमबुद्धनगर के दनकौर देहात में पुश्तैनी आबादी की जमीन पर बिना पूर्व सूचना और नोटिस जेसीबी चलाकर मकान व बाउंड्री तोड़ने का मामला सामने आया है। पीड़ित परिवार ने जिलाधिकारी गौतमबुद्धनगर को प्रार्थना पत्र देकर कार्रवाई और न्याय की मांग की है। शिकायत में करीब 80 लाख रुपये के नुकसान का दावा किया गया है।

शिकायत के अनुसार मामला ग्राम दनकौर देहात स्थित खसरा संख्या 436, रकबा 0.7021 हेक्टेयर और खाता संख्या 00135 की दादालाही पुश्तैनी आबादी भूमि से जुड़ा है। पीड़ित परिवार का कहना है कि 25 अगस्त 2026 को उनके मकान और पुरानी बाउंड्री को जेसीबी से तोड़ दिया गया।

शिकायत में नगर पंचायत अध्यक्ष और अधिकारियों पर लगाए आरोप

पीड़ित राजकुमार और आजाद सिंह पुत्रगण स्वर्गीय पीतम सिंह तथा अनिल और सुबोध पुत्रगण स्वर्गीय गजराज सिंह, निवासी गढ़ी मोहल्ला दनकौर ने जिलाधिकारी को दिए प्रार्थना पत्र में कई गंभीर आरोप लगाए हैं।

शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि 25 अगस्त को नगर पंचायत दनकौर की वर्तमान चेयरमैन राजवती पत्नी जय सिंह और उनके पुत्र दीपक पुत्र जय सिंह के कथित षड्यंत्र के तहत तहसीलदार सदर पूजा, कानूनगो किरणपाल बिधूड़ी, पटवारी शीतला प्रसाद और कुछ अन्य लोग दो जेसीबी मशीनों के साथ मौके पर पहुंचे।

पीड़ितों का दावा है कि कार्रवाई के दौरान तहसील और नगर पंचायत से जुड़े लोगों ने तहसीलदार की ओर इशारा करते हुए उन्हें बताया कि मौके पर जिलाधिकारी मेधा रूपम आई हैं। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि DM का नाम लेकर परिवार को डराया और दबाव में लिया गया।

हालांकि, बाद में तहसील सदर जाने पर पीड़ितों को कथित तौर पर जानकारी हुई कि मौके पर जिलाधिकारी नहीं, बल्कि तहसीलदार मौजूद थीं।

बिना नोटिस मकान तोड़ने से 80 लाख रुपये के नुकसान का दावा

पीड़ित परिवार के अनुसार, कार्रवाई के दौरान उनके पक्के मकान और पुरानी बाउंड्री को दो जेसीबी मशीनों से तोड़ा गया। शिकायतकर्ताओं ने करीब 80 लाख रुपये के नुकसान का दावा किया है।

आरोप है कि जब परिवार ने कार्रवाई का विरोध किया तो उन्हें पड़ोस के एक मकान में बंद कर दिया गया। शिकायत में मोबाइल फोन छीने जाने और जेल भेजने की धमकी दिए जाने का भी आरोप लगाया गया है।

पीड़ितों का कहना है कि एक व्यक्ति द्वारा पूरी कार्रवाई का वीडियो बनाए जाने की कोशिश की गई, लेकिन उसे भी कथित तौर पर डराकर वहां से भगा दिया गया। बाद में जब गांव के लोग मौके पर पहुंचने लगे तो जेसीबी और अन्य वाहनों से आए लोग वहां से चले गए।

112 पर कॉल के बाद भी कार्रवाई नहीं होने का आरोप

शिकायतकर्ताओं ने बताया कि घटना के दौरान उन्होंने पुलिस की आपातकालीन सेवा 112 पर भी कॉल की थी। शिकायत में EVENT ID P32092605247 और PRB UP32DG 9631 का उल्लेख किया गया है।

पीड़ितों का आरोप है कि मौके पर पहुंची पुलिस ने इसे तहसील और नगर पंचायत से संबंधित मामला बताते हुए तत्काल कार्रवाई नहीं की।

परिवार का कहना है कि इसके बाद उन्होंने तहसील सदर में अधिकारियों से संपर्क किया। वहां कथित तौर पर उन्हें बताया गया कि मौके पर जिलाधिकारी नहीं, बल्कि तहसीलदार मौजूद थीं।

एक महीने से अधिक समय से कार्रवाई का इंतजार

पीड़ितों का आरोप है कि तहसीलदार ने बाद में उनसे जमीन से संबंधित दस्तावेज मांगे और शिकायत आगे न बढ़ाने की बात कही। शिकायत में यह भी दावा किया गया है कि मकान और बाउंड्री दोबारा बनवाने का आश्वासन दिया गया था।

हालांकि, पीड़ित परिवार के अनुसार इसके बाद भी उन्हें एक महीने से अधिक समय से अधिकारियों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं और उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ है। शिकायतकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें संबंधित दस्तावेज जमा करने के बावजूद उचित रिसीविंग नहीं दी गई।

चुनावी रंजिश को कार्रवाई की वजह बता रहे पीड़ित

पीड़ित परिवार ने अपनी शिकायत में कार्रवाई के पीछे कथित चुनावी रंजिश का भी आरोप लगाया है। उनका कहना है कि उनके परिवार के सदस्य ललित नागर पुत्र आजाद सिंह नगर पंचायत दनकौर में कार्यरत थे।

शिकायतकर्ताओं के मुताबिक, ललित नागर को वर्तमान नगर पंचायत अध्यक्ष द्वारा कथित चुनावी रंजिश के चलते नौकरी से हटवा दिया गया था। पीड़ित परिवार का आरोप है कि इसी रंजिश के चलते उनके पुश्तैनी मकान और बाउंड्री पर कार्रवाई कराई गई।

इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष सामने आने पर खबर में उसे भी प्रमुखता से शामिल किया जाएगा।

90 प्रतिशत निर्माण टूटने का दावा, बाकी हिस्से को लेकर चिंता

पीड़ित परिवार का कहना है कि उनके मकान और बाउंड्री का करीब 90 प्रतिशत हिस्सा पहले ही तोड़ा जा चुका है, जबकि लगभग 10 प्रतिशत हिस्सा अभी बचा हुआ है।

परिवार ने शिकायत में दावा किया है कि उन्हें जानकारी मिली है कि बचे हुए हिस्से को भी तोड़ने की तैयारी की जा रही है। इसी आधार पर उन्होंने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप कर शेष निर्माण को नुकसान से बचाने की मांग की है।

DM से मुआवजा, FIR और विभागीय जांच की मांग

पीड़ित परिवार ने जिलाधिकारी से मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनकी प्रमुख मांगों में करीब 80 लाख रुपये के नुकसान की भरपाई, कथित रूप से जिम्मेदार लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करना और ADM स्तर के अधिकारी से विभागीय जांच कराना शामिल है।

इसके साथ ही पीड़ितों ने शेष 10 प्रतिशत निर्माण पर तत्काल रोक लगाने की मांग भी की है, ताकि जांच पूरी होने तक किसी प्रकार की अतिरिक्त कार्रवाई न हो।

शिकायतकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि उन्हें न्याय नहीं मिला तो वे DM कार्यालय पर आत्मदाह और हाईकोर्ट की शरण लेने के लिए मजबूर होंगे। प्रशासन की ओर से इस शिकायत पर क्या कार्रवाई की जाती है, यह आगे महत्वपूर्ण होगा।

प्रशासन के जवाब पर टिकी आगे की कार्रवाई

मामला एक ओर पुश्तैनी आबादी की जमीन, दूसरी ओर प्रशासनिक कार्रवाई और कथित नुकसान से जुड़ा है। ऐसे में पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच के बाद ही आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

फिलहाल पीड़ित परिवार ने जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र देकर अपनी शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत की प्राप्ति पर 28 सितंबर 2026 की तारीख का उल्लेख किया गया है। अब पीड़ितों की नजर प्रशासन की जांच और कार्रवाई पर है।

 

 

 

 

 

 

डिस्क्लेमर: इस समाचार में उल्लेखित आरोप, दावे और घटनाक्रम संबंधित शिकायतकर्ता द्वारा जिलाधिकारी को दिए गए प्रार्थना पत्र एवं उपलब्ध जानकारी के आधार पर प्रकाशित किए गए हैं। Khas Awaaz इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है और न ही किसी व्यक्ति, संस्था अथवा अधिकारी को दोषी ठहरा रहा है। मामले में संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष या प्रशासनिक/कानूनी जांच का निष्कर्ष सामने आने पर उसे भी उचित स्थान दिया जाएगा। पाठकों से अनुरोध है कि समाचार में उल्लिखित आरोपों को अंतिम अथवा न्यायिक रूप से सिद्ध तथ्य न मानें। किसी व्यक्ति या संस्था की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाना Khas Awaaz का उद्देश्य नहीं है।

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