ऐच्छर, मायचा, डाबरा और बिरोंडा के किसानों ने प्रेसवार्ता कर किया ऐलान
संगठन की कार्यशैली और किसान मुद्दों पर अपेक्षित परिणाम नहीं मिलने का लगाया आरोप
ग्रेटर नोएडा। भाकियू अराजनैतिक संगठन को लेकर चार गांवों के किसानों के एक समूह ने संगठन से अलग होने की घोषणा की है। मंगलवार को ऐच्छर, मायचा, डाबरा और बिरोंडा गांव के किसानों ने सेक्टर अल्फा-1 स्थित प्रेस क्लब ऑफ भारत में प्रेसवार्ता कर यह जानकारी दी। किसानों ने भाकियू अराजनैतिक की कार्यशैली और पिछले कुछ वर्षों में किसान मुद्दों को लेकर किए गए प्रयासों पर सवाल उठाए।
प्रेसवार्ता में मौजूद किसान नेताओं ने कहा कि उन्होंने किसान हित से जुड़े कई कार्यक्रम अपने स्तर पर आयोजित किए। किसानों के अनुसार, इन कार्यक्रमों में संगठन की ओर से अपेक्षित सहयोग नहीं मिला। इसी के चलते उन्होंने अब संगठन से अलग होकर अपने स्तर पर किसान मुद्दों की लड़ाई लड़ने का फैसला किया है।
चार गांवों के किसानों ने संगठन से अलग होने का किया ऐलान
प्रेसवार्ता में ऐच्छर, मायचा, डाबरा और बिरोंडा गांव से जुड़े किसानों ने भाकियू अराजनैतिक से दूरी बनाने की घोषणा की। किसानों ने कहा कि अब वे फिलहाल किसी दूसरे किसान संगठन में शामिल नहीं होंगे।
किसानों के अनुसार, उनका उद्देश्य गांव स्तर पर किसानों को एकजुट करना और स्थानीय समस्याओं को लेकर आगे की रणनीति तैयार करना है। उन्होंने कहा कि किसान अपने अधिकारों और समस्याओं की लड़ाई अब स्वयं लड़ेंगे।
हालांकि, यह किसानों की ओर से लगाए गए आरोप और उनके द्वारा लिया गया संगठनात्मक निर्णय है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी के आधार पर नहीं हुई है। इस संबंध में भाकियू अराजनैतिक संगठन का पक्ष इस प्रेसवार्ता की जानकारी में सामने नहीं आया है।
ट्रैक्टर मार्च और पंचायतों में सहयोग नहीं मिलने का दावा
किसान नेता विजय भाटी मायचा ने प्रेसवार्ता में कहा कि किसानों ने अपने स्तर पर खर्च कर गौतमबुद्ध नगर में बड़ा ट्रैक्टर मार्च निकाला था।
उन्होंने दावा किया कि किसानों की ओर से अपने खर्च पर चार से पांच पंचायतों का भी आयोजन किया गया। विजय भाटी के अनुसार, इन कार्यक्रमों में संगठन की ओर से अपेक्षित सहयोग नहीं मिला।
उन्होंने कहा कि किसानों ने संगठन पर भरोसा किया था। लेकिन उनके अनुसार, समय के साथ उन्हें लगा कि संगठन की ओर से उनकी अपेक्षाओं के अनुरूप काम नहीं किया जा रहा है।
किसानों ने इन गतिविधियों का उल्लेख करते हुए कहा कि स्थानीय स्तर पर किसान स्वयं संसाधन जुटाकर अपने मुद्दों को उठाते रहे हैं।
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के खिलाफ आंदोलन का भी किया जिक्र
किसान नेता विक्रम भाटी ने ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण के खिलाफ चले करीब सात महीने के आंदोलन का भी जिक्र किया।
उन्होंने कहा कि किसानों की ओर से लंबे समय तक आंदोलन किया गया। इसके बावजूद किसानों की मांगों को लेकर उन्हें अपेक्षित परिणाम नहीं मिले।
विक्रम भाटी ने पिछले तीन वर्षों के दौरान किसान मुद्दों पर हुई प्रगति को लेकर भी सवाल उठाए। उनके अनुसार, किसानों की समस्याओं को लेकर जिस तरह की प्रगति की उम्मीद थी, वह दिखाई नहीं दी।
यह बयान किसानों की ओर से प्रेसवार्ता में रखा गया पक्ष है। उपलब्ध जानकारी में संबंधित प्राधिकरण या भाकियू अराजनैतिक की ओर से इन आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया शामिल नहीं है।
अब अपने स्तर पर किसान मुद्दों की लड़ाई लड़ने की बात
प्रेसवार्ता में किसानों ने स्पष्ट किया कि वे फिलहाल किसी अन्य किसान संगठन का हिस्सा नहीं बनेंगे। उनका कहना है कि वे गांव स्तर पर किसानों को एकजुट करेंगे और स्थानीय समस्याओं को लेकर आगे की रणनीति स्वयं तैयार करेंगे।
किसानों के अनुसार, उनका फोकस अपने अधिकारों और स्थानीय मुद्दों पर रहेगा। इसके लिए गांवों में किसानों के बीच संवाद बढ़ाने और सामूहिक रूप से आगे की कार्रवाई तय करने की बात कही गई।
इस फैसले के बाद चार गांवों से जुड़े किसानों का समूह अपनी गतिविधियों को किस रूप में आगे बढ़ाता है, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।
जल्द होगी एक और प्रेसवार्ता
प्रेसवार्ता में अनिल नागर ने बताया कि जल्द ही एक और प्रेसवार्ता आयोजित की जाएगी। उन्होंने कहा कि इस दौरान किसान नेताओं और विभिन्न किसान संगठनों की कार्यशैली को लेकर किसानों की ओर से अपनी बात सार्वजनिक की जाएगी।
इससे संकेत मिलता है कि किसान समूह आने वाले दिनों में अपनी रणनीति और संगठनात्मक रुख को लेकर और जानकारी सार्वजनिक कर सकता है।
फिलहाल किसानों ने किसी अन्य संगठन में शामिल होने से इनकार किया है। उनका कहना है कि वे अपने स्तर पर ही किसान मुद्दों को उठाएंगे।
प्रेसवार्ता में ये किसान रहे मौजूद
प्रेसवार्ता में विजय भाटी मायचा, डॉ. फकीरचंद पाल, विनोद भाटी, विक्रम भाटी, आशीष नागर, सुनील भाटी, ललित भाटी, अनिल नागर और यासीन खान सहित अन्य किसान मौजूद रहे।
किसानों ने प्रेसवार्ता के दौरान अपने निर्णय और संगठन से अलग होने के कारणों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने किसान मुद्दों को लेकर भविष्य में गांव स्तर पर एकजुट होकर काम करने की बात कही।
भाकियू अराजनैतिक से अलग होने की घोषणा करने वाले किसानों की ओर से लगाए गए आरोपों पर संगठन का आधिकारिक पक्ष उपलब्ध जानकारी में सामने नहीं आया है। इसलिए इन दावों को किसानों के बयान के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
किसान संगठनों की भूमिका पर भी उठे सवाल
इस घटनाक्रम के साथ किसान संगठनों की भूमिका और स्थानीय स्तर पर किसानों की अपेक्षाओं का मुद्दा भी सामने आया है। प्रेसवार्ता में किसानों ने अपने अनुभवों का हवाला देते हुए संगठन की कार्यशैली पर सवाल उठाए।
किसानों का कहना है कि किसान संगठनों से जुड़ने का उद्देश्य सामूहिक रूप से समस्याओं को उठाना और उनके समाधान के लिए प्रभावी प्रयास करना होता है। उनके अनुसार, जब उन्हें अपेक्षित सहयोग नहीं मिला तो उन्होंने संगठन से अलग होने का निर्णय लिया।
दूसरी ओर, भाकियू अराजनैतिक की ओर से इस घटनाक्रम पर आधिकारिक प्रतिक्रिया आने के बाद ही संगठन का पक्ष भी स्पष्ट हो सकेगा।
फिलहाल चार गांवों के किसानों की ओर से संगठन से अलग होने की घोषणा के बाद स्थानीय किसान राजनीति और संगठनात्मक गतिविधियों में इस घटनाक्रम को लेकर चर्चा तेज हो गई है। आने वाले दिनों में किसानों की अगली रणनीति और प्रस्तावित प्रेसवार्ता से स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है।


