प्रेस वार्ता में किसान नेताओं ने सरकार से शीघ्र समाधान की अपील की
कहा- वर्षों पुराने समझौते और हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद नहीं मिला पूरा अधिकार
ग्रेटर नोएडा। ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण (जीएनआईडीए) के अधिसूचित क्षेत्र के 44 गांवों के किसानों ने 4% अतिरिक्त आबादी भूखंड की मांग को लेकर अपनी आवाज एक बार फिर बुलंद की है। किसानों ने राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी को ज्ञापन सौंपकर इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है। किसानों का कहना है कि वर्षों पहले हुए समझौते और प्रशासनिक आश्वासनों के बावजूद आज तक उन्हें पूरा अधिकार नहीं मिल सका है।
इसके साथ ही, किसानों ने प्रेस वार्ता आयोजित कर अपनी मांगों को विस्तार से रखा। किसान नेताओं ने कहा कि यह केवल भूखंड का मुद्दा नहीं है, बल्कि हजारों किसान परिवारों के अधिकार और सम्मान का प्रश्न है।
2010 के आंदोलन के बाद हुआ था समझौता
किसानों ने बताया कि वर्ष 2010 में मुआवजा वृद्धि और आबादी भूखंड की मांग को लेकर बड़ा किसान आंदोलन हुआ था। आंदोलन के दौरान पांच किसानों की दुखद मृत्यु हो गई थी। इसके बाद तत्कालीन सरकार ने एक समिति का गठन किया। समिति की अध्यक्षता तत्कालीन मंत्री ठाकुर जयवीर सिंह ने की थी।
समिति की बैठक में किसानों और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के बीच सहमति बनी। इस सहमति के अनुसार किसानों को 64.7 प्रतिशत मुआवजा और 6 प्रतिशत के स्थान पर 10 प्रतिशत आबादी भूखंड देने का निर्णय लिया गया।
हाईकोर्ट के आदेश का भी किया उल्लेख
किसानों ने ज्ञापन में कहा कि उस समय यह मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट में विचाराधीन था। बाद में न्यायालय ने किसानों और प्राधिकरण के बीच हुए समझौते को स्वीकार करते हुए आदेश पारित किया। न्यायालय ने यह भी निर्देश दिया कि जो किसान अदालत नहीं पहुंचे थे, उनके मामलों में भी प्राधिकरण उचित निर्णय ले।
इसके बाद, तत्कालीन मुख्य कार्यपालक अधिकारी ने किसानों से शपथ-पत्र लेकर भरोसा दिलाया कि सभी पात्र किसानों को 64.7 प्रतिशत मुआवजा और 10 प्रतिशत आबादी भूखंड का लाभ मिलेगा।
2016 में प्रस्ताव लागू हुआ, लेकिन 4% अतिरिक्त आबादी भूखंड अब भी लंबित
किसानों का कहना है कि वर्ष 2016 में तत्कालीन सरकार ने 10 प्रतिशत आबादी भूखंड संबंधी प्रस्ताव को लागू कर दिया। हालांकि, जिन किसानों ने न्यायालय का सहारा नहीं लिया था, उन्हें केवल 10 प्रतिशत आबादी भूखंड दिया गया। 4 प्रतिशत अतिरिक्त आबादी भूखंड का लाभ आज तक नहीं मिल सका।
किसानों ने यह भी बताया कि प्राधिकरण ने बाद में कुछ किसानों को अतिरिक्त भूखंड देने का प्रस्ताव तैयार किया था। लेकिन शासन स्तर पर उसे अंतिम मंजूरी नहीं मिल सकी। इसी कारण हजारों किसान आज भी अपने अधिकार की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
बोर्ड बैठकों में भी उठ चुका है मामला
ज्ञापन के अनुसार ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की कई बोर्ड बैठकों में इस विषय पर चर्चा हुई। प्रस्ताव शासन को भी भेजे गए। फिर भी अंतिम निर्णय नहीं लिया गया।
किसानों का कहना है कि अलग-अलग किसानों के लिए अलग-अलग नीति अपनाई गई। इस कारण प्रभावित किसानों में असंतोष बढ़ा है। उनका कहना है कि सभी किसानों के साथ समान व्यवहार होना चाहिए और लंबित 4 प्रतिशत अतिरिक्त आबादी भूखंड जल्द दिया जाना चाहिए।
प्रेस वार्ता में आंदोलन की चेतावनी
प्रेस वार्ता को प्रकाश प्रधान, सतपाल प्रधान, मुखिया बीडीसी, राकेश विरोंडा और धर्मेंद्र मायंचा ने संबोधित किया। सभी वक्ताओं ने कहा कि किसानों की मांग पूरी तरह न्यायसंगत है।
वहीं, किसान नेताओं ने कहा कि वर्षों से केवल आश्वासन दिए जा रहे हैं। अब सरकार को ठोस निर्णय लेना चाहिए। उन्होंने राष्ट्रीय लोकदल अध्यक्ष जयंत चौधरी से इस मुद्दे को केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार के समक्ष प्रमुखता से उठाने का आग्रह किया।
अंत में, किसान नेताओं ने स्पष्ट किया कि यदि शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो 44 गांवों के किसान लोकतांत्रिक तरीके से व्यापक आंदोलन शुरू करने के लिए बाध्य होंगे। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार किसानों की भावनाओं को समझते हुए जल्द सकारात्मक निर्णय लेगी।



